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कर्म, जीवन और भविष्य

हिन्दी · पृष्ठभूमि परिचय
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पाठ

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विषय-सूची

| कैथोलिक मध्यस्थ प्रार्थना | धर्मशिक्षा दूसरों के लिए ईश्वर से विनय करने को प्रार्थना का एक रूप बताती है। | प्रार्थना करने वाला, ईश्वर से निवेदन और जिसकी भलाई माँगी जाती है, इस संबंध के अंग हैं। पुस्तक के अध्याय 2⁠9 में परिजन का पाठ, सहायता पाने वाले के पुराने सत्कर्म और उसका अपना पश्चात्ताप साथ आते हैं। |

| ब्राज़ील के एस.सी.ई.ई. समुदाय का पासे | समुदाय अपनी आध्यात्मिक परंपरा में मनुष्य और आत्माओं से मिलने वाले सूक्ष्म बल को फ्लुइदो कहता है। स्वयंसेवी माध्यम और उच्चतर आत्माएँ सहायता करती हैं; सामान्यतः हाथ पास लाकर क्रिया की जाती है। ग्रहण करने वाले के भीतरी सुधार को भी महत्त्व दिया जाता है। | इस विवरण में सहायता देने वाले, पहुँचाए जाने वाले बल और सहायता पाने वाले के बदलाव का संबंध है। चीनी बौद्ध पुण्य-समर्पण में किए हुए सत्कर्म, उनके पुण्य को किसी जीव के हित में अर्पित करने का संकल्प और उस जीव की परिस्थितियाँ सहायता को समझाती हैं। |

| अंगुत्तर निकाय 1⁠0⁠.⁠1⁠7⁠7 में मृत संबंधियों के लिए अर्पण | इस संवाद में प्रेतों की अवस्था अर्पण ग्रहण करने का उपयुक्त स्थान कही गई है। नरक, तिर्यक्, मनुष्य और देव अपनी अवस्था के आहार से रहते हैं। दाता को अपने दान का फल मिलता है। | मूल प्रश्न मृत संबंधियों के अर्पण ग्रहण करने का है; प्राप्तकर्ता की अवस्था और अनुकूल परिस्थिति महत्त्वपूर्ण हैं। पुस्तक के अन्य उद्धार-प्रसंगों की शर्तें उनके साथ समझाई जाती हैं। |

| थाई डी.एम.सी. की क्रुआत नाम संबंधी व्याख्या | जल डालना पुण्य को दूसरों या परिजनों के लिए समर्पित करने की कामना व्यक्त करता है और मन को शांत तथा उदार करता है। अभ्यासयुक्त व्यक्ति सीधे मन से भी समर्पण कर सकता है। लाभ ग्रहण करने वाले की उस समय की अवस्था से जुड़ता है। | जल की क्रिया संकल्प और एकाग्रता को व्यक्त करती है; अभ्यास के साथ दाता की भावना और प्राप्तकर्ता की परिस्थितियाँ भी समझी जाती हैं। |

| होंग्वान्जी परंपरा की अन्य-शक्ति | होंग्वान्जी के प्रकाशित परिचय में अन्य-शक्ति तथागत के मूल प्रणिधान की शक्ति है। इसमें अमिताभ द्वारा जीवों का ग्रहण, उस प्रणिधान में श्रद्धा और नाम-स्मरण का संबंध आता है। | इस संप्रदाय का शब्द अपने विश्वास-संबंध को व्यक्त करता है। इस पुस्तक के भ्रूण-आत्मा प्रसंग में भीतरी बल सच्चा पश्चात्ताप और बाहरी बल पुण्य संचय तथा सत्कर्म है; शुद्ध और उचित रीति वाले धर्मस्थल का सहयोग भी स्वीकार किया गया है। |

पुस्तक में आए ग्रंथ और अन्य शीर्षक

इस सूची में चालीस नाम-प्रयोग हैं। इनमें ग्रंथों के पूरे नाम, संक्षिप्त नाम, सूत्रों के अध्याय, कविताएँ, आदेश-पत्र और कुछ स्थानों के नाम आते हैं। हर प्रविष्टि में चीनी नाम, उसका देवनागरी उच्चारण और पुस्तक में उसका अर्थ दिया गया है।

阴律无情 — यिन ल्यू वू छिंग

Y⁠i⁠n lü w⁠u q⁠i⁠n⁠g

यिन ल्यू वू छिंग इस चीनी सदाचार-ग्रंथ का मूल नाम है। लेखिका अपने अनुभव को जाग्रत अवस्था में देव-सहायता से हुए परलोक निरीक्षण और उसके बाद क्रमशः लिखे तथा सुधारे गए विवरण के रूप में बताती हैं। प्रस्तावना इसे पहले के यु-ली बाओ-छाओ के साथ रखती है। पुस्तक में लेखिका का आत्मकथन, संवाद के पात्र, उद्धृत सूत्र तथा अंत के पाठकों के अनुभव अपनी अलग आवाज़ रखते हैं। इस प्रकार चीनी नाम के नीचे यात्रा-वृत्तांत, कर्म पर प्रश्नोत्तर और आचरण सुधारने के उपदेश साथ मिलते हैं।

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