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कर्म, जीवन और भविष्य

हिन्दी · पृष्ठभूमि परिचय
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विषय-सूची

Y⁠o⁠u p⁠o s⁠a⁠i j⁠i⁠e j⁠i⁠n⁠g

योउ-पो-साइ ज्ये जिंग उपासक के नियमों से संबंधित चीनी सूत्रनाम है। पुस्तक इससे प्राण-हानि के वर्तमान जीवन और आगे के जीवन में पड़ने वाले फल का अंश उद्धृत करती है। उसके बाद चर्चा गर्भसमापन करने वाले चिकित्सकों पर पूछे गए प्रश्न की ओर बढ़ती है। सूत्र का उद्धरण पहले शील की व्यापक भूमि देता है; पान-ग्वान का अगला संवाद विशेष काम, परिस्थिति और फल का विवरण रखता है। इस क्रम से ग्रंथ की सामान्य सीख और यिन ल्यू वू छिंग के विशिष्ट उदाहरण का संबंध स्पष्ट होता है।

梵网经 — फ़ान-वांग जिंग

F⁠a⁠n w⁠a⁠n⁠g j⁠i⁠n⁠g

फ़ान-वांग जिंग का यह उल्लेख चीनी बोधिसत्त्व-शील की परंपरा से जुड़ा है। दो उद्धरण सभी स्त्री-पुरुषों को अनेक जन्मों के माता-पिता के संबंध में देखते हैं और जीवों की रक्षा को महत्त्व देते हैं। स्वयं किसी जीव को मारना, दूसरे से मरवाना और उपाय देकर प्राण-हानि कराना भी इसी शील-विवेचन में आता है। पुस्तक इस करुणामय संबंध को आगे के प्रश्नों की भूमि बनाती है। इस स्थान पर नाम की पहचान उसके बोधिसत्त्व-व्रत संबंधी अंश से होती है, और चिकित्सकों के विशेष प्रसंग उसके बाद अपने संवाद में आते हैं।

普门品 — पू-मेन पिन

P⁠u m⁠e⁠n p⁠i⁠n

पू-मेन पिन अवलोकितेश्वर से संबंधित अध्याय का छोटा चीनी नाम है। पुस्तक इससे दुःख की पुकार सुनने और उपयुक्त रूप धारण कर सहायता करने की सीख लेती है। पहले नाम-स्मरण का उद्धरण आता है, फिर जिन रूपों से उपदेश ग्रहण हो सकता है, उन रूपों में प्रकट होने की बात। इसी भूमि पर बत्तीसवें अध्याय के पान-ग्वान मरियम के दिखाई दिए रूप की अपनी व्याख्या रखते हैं। पूरा नाम म्याओ-फ़ा ल्येन-ह्वा जिंग ग्वान-शि-यिन पू-सा पू-मेन पिन है; अंत के अनुभवलेखक ने भी इसी विषय पर अपना विचार जोड़ा है।

易 — यी

Y⁠i

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