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कर्म, जीवन और भविष्य

हिन्दी · पृष्ठभूमि परिचय
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पाठ

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विषय-सूची

यी चीनी परंपरा के एक प्राचीन शास्त्र का छोटा नाम है। पुस्तक के उपसंहार में यिन-ग्वांग के राष्ट्र की रक्षा और विपत्ति शांत करने संबंधी उपदेश से उद्धरण लिया गया है; उसके भीतर यी की पंक्ति फिर आती है। संचित अच्छे या बुरे कर्म का प्रभाव परिवार तक पहुँचने की बात इस संयुक्त उद्धरण का केंद्र है। चीनी शास्त्रीय नैतिक भाषा और बौद्ध कर्मफल यहाँ एक-दूसरे को समझाते हैं। यू-छिंग, बचा रहने वाला शुभ प्रभाव, परिवार के आगे के कल्याण को व्यक्त करता है।

书 — शू

S⁠h⁠u

‘शू’ (《书》) प्राचीन चीनी दस्तावेज़-संग्रह ‘शांग-शू’ (《尚书》) का संक्षिप्त नाम है। यिन ल्यू वू छिंग के उपसंहार में यिन-ग्वांग के राष्ट्र की रक्षा और विपत्ति शांत करने संबंधी उपदेश से उद्धरण लिया गया है। उस उपदेश में शू और यी, दो चीनी शास्त्रों के वचन साथ आते हैं। शू की पंक्ति अच्छा आचरण अनेक शुभ फल और बुरा आचरण अनेक विपत्तियाँ लाने से जोड़ती है। पहले प्राचीन शास्त्र का कथन है, फिर यिन-ग्वांग उसका नैतिक अर्थ सामने रखते हैं, और अंत में यह पुस्तक उस उपदेश को अपने पाठकों तक पहुँचाती है। इस क्रम में शू एक निश्चित ग्रंथ का नाम है और उसका उद्धरण कर्म के आगे फैलने वाले परिणाम समझाने के लिए आया है।

冥府灵体通牒 — मिंग-फ़ू लिंग-ती तोंग-द्ये

M⁠i⁠n⁠g f⁠u l⁠i⁠n⁠g t⁠i t⁠o⁠n⁠g d⁠i⁠e

मिंग-फ़ू लिंग-ती तोंग-द्ये अधोलोक के कार्यालय की मृत्यु-सूचना का नाम है; इसका संक्षिप्त नाम मिंग-द्ये है। उसमें व्यक्ति, स्थान, वर्ष से लेकर सेकंड तक मृत्यु का समय और उसका कारण लिखा जाता है। हल्का पीला पत्र शुभ कर्म प्रधान व्यक्ति को लेने आने वाले पुरस्कार और दंड विभाग के अधिकारियों के पास होता है। गहरा लाल पत्र अशुभ कर्म प्रधान व्यक्ति को लेने आने वाले बैल-मुख और घोड़ा-मुख के पास होता है। कर्मचारी पत्र पर मृत्यु का क्रम पहले ही देख लेते हैं। यदि कभी गलती से किसी अन्य जीव को ले आएँ, तो उसे तुरंत वापस भेजा जाएगा और यान-वांग कारण की जाँच करेंगे। शिशु-जीव का पीला अनुमति-पत्र यान-वांग की स्वीकृति से उसे अपने नगर से निकलकर माता-पिता को खोजने देता है।

关帝圣君戒淫经 — ग्वान-दी शंग-ज्युन ज्ये-यिन जिंग

G⁠u⁠a⁠n d⁠i s⁠h⁠e⁠n⁠g j⁠u⁠n j⁠i⁠e y⁠i⁠n j⁠i⁠n⁠g

ग्वान-दी शंग-ज्युन ज्ये-यिन जिंग विषयसूची में आए उपदेश का शीर्षक है, जिसके बाद टिप्पणी का संकेत जुड़ता है। परिशिष्ट के मुख्य पाठ में नाम का क्रम ग्वान-शंग दी-ज्युन ज्ये-यिन जिंग झू-ज्ये है। दोनों रूप एक ही पाठ तक पहुँचने के दो संकेत बनते हैं। भीतर दी-ज्युन के नाम से कथन, उसकी सरल भाषा में व्याख्या और नैतिक उदाहरण क्रम से रखे गए हैं। ऐतिहासिक ग्वान यू, पूजित ग्वान दी और इस धार्मिक व्याख्या-ग्रंथ की आवाज़ अपने-अपने संदर्भ में पहचान देती हैं।

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