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कर्म, जीवन और भविष्य

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विषय-सूची

P⁠u x⁠i⁠a⁠n s⁠h⁠i d⁠a y⁠u⁠a⁠n

पू-श्येन शि-दा युआन समंतभद्र के दस महान संकल्पों का नाम है। अंत का अनुभवलेखक इसे जिन-गांग जिंग के साथ सुबह के नियमित पाठ में रखता है। उसी आत्मकथन में क्षितिगर्भ सूत्र पढ़ने के एक अधूरे वचन का भी उल्लेख आता है, जिससे पहले से चल रही दिनचर्या और नया संकल्प अलग दिखाई देते हैं। इस शीर्षक का यहाँ महत्त्व इच्छा को साधना और व्यवहार से जोड़ना है। उपलब्ध नाम व्रत-विषय और दैनिक पाठ की भूमिका बताता है; पढ़े गए विशेष चयन या संस्करण का विस्तार अलग प्रति में मिलता है।

杂阿含经 — ज़ा आ-हान जिंग

Z⁠a a h⁠a⁠n j⁠i⁠n⁠g

ज़ा आ-हान जिंग एक बौद्ध सूत्र-संग्रह का चीनी नाम है। अंत का अनुभवलेख इससे नाखून पर लगी थोड़ी मिट्टी और विशाल धरती की तुलना लेता है। बहुत कम और बहुत अधिक के इस अंतर से मनुष्य-जन्म की दुर्लभता तथा अच्छे आचरण का मूल्य स्पष्ट किया जाता है। उपमा का बल जीवन के अवसर को सँभालने पर है। उसी अनुच्छेद में निर्वाण सूत्र से जुड़ी मिलती-जुलती छवि आती है। दोनों नाम अपने उद्धृत संदर्भ को पहचानते हैं और लेखक की नैतिक प्रेरणा को सहारा देते हैं।

涅盘经 — न्ये-पान जिंग

N⁠i⁠e p⁠a⁠n j⁠i⁠n⁠g

‘न्ये-पान जिंग’ (《涅盘经》) निर्वाण सूत्र का संक्षिप्त चीनी नाम है। यिन ल्यू वू छिंग के अंतिम अनुभवलेख में बुद्ध और काश्यप का संवाद इसी नाम से उद्धृत होता है। थोड़ी-सी हाथ की मिट्टी की तुलना दसों दिशाओं की विशाल धरती से की जाती है। इतने बड़े अंतर से लेखक मनुष्य-जन्म और अच्छे आचरण के दुर्लभ अवसर का मूल्य समझाता है। उसी अनुच्छेद में ज़ा आ-हान जिंग के नाम से नाखून की मिट्टी का दूसरा उदाहरण भी है। दोनों उपमाएँ जीवन के अवसर को सँभालने की प्रेरणा देती हैं और दोनों के सामने उनके ग्रंथनाम लिखे हैं। विस्तृत पाठ तथा उसके संस्करण तक पहुँचने के लिए इस उद्धृत नाम और बुद्ध-काश्यप संवाद, दोनों को खोज का आधार बनाया जा सकता है।

妙法莲华经观世音菩萨普门品 — म्याओ-फ़ा ल्येन-ह्वा जिंग ग्वान-शि-यिन पू-सा पू-मेन पिन

M⁠i⁠a⁠o f⁠a l⁠i⁠a⁠n h⁠u⁠a j⁠i⁠n⁠g g⁠u⁠a⁠n s⁠h⁠i y⁠i⁠n p⁠u s⁠a p⁠u m⁠e⁠n p⁠i⁠n

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