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कर्म, जीवन और भविष्य

हिन्दी · पृष्ठभूमि परिचय
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विषय-सूची

फ़ो श्वो फ़ा-म्ये-जिन जिंग उस उद्धरण का शीर्षक है जिससे पहले खंड के सत्रहवें अध्याय में युग के क्षय की चर्चा खुलती है। लेखिका अपने समय के आचरण को धर्म के कमजोर पड़ने की धार्मिक समय-दृष्टि में रखती हैं। उद्धृत अंश नैतिक पतन, आयु में कमी और स्त्री-पुरुषों की जीवन-अवधि की बात करता है। उसका स्थान इस अध्याय में सावधानी और संयम की प्रेरणा देना है। युग के इस वर्णन के बाद लेखिका मन की कामना सँभालने और शील में स्थिर रहने की बात करती हैं।

佛说四十二章经 — फ़ो श्वो सि-शि-अर झांग जिंग

F⁠o s⁠h⁠u⁠o s⁠i s⁠h⁠i e⁠r z⁠h⁠a⁠n⁠g j⁠i⁠n⁠g

फ़ो श्वो सि-शि-अर झांग जिंग के नाम में बयालीस अध्यायों की संरचना का संकेत है। इससे लिया गया छोटा पद्य इच्छा को विचार से जोड़ता है। लेखिका उसके बाद मन में पोसी जाने वाली यौन आसक्ति और जन्म-मरण के बीज की चर्चा करती हैं। इस क्रम में उद्धृत पद्य पहले मन की भूमिका बताता है, फिर यिन ल्यू वू छिंग उसी विषय को अपने शब्दों में आगे बढ़ाती है। विचार को आरंभ में सँभालने की बात इसीलिए आगे के आचरण और जन्म-मरण की चर्चा से जुड़ती है।

大佛顶如来密因修证了义诸菩萨万行首楞严经 — दा फ़ो-दिंग रू-लाई मी-यिन श्योउ-झंग ल्याओ-यी झू पू-सा वान-शिंग शोउ लंग-यान जिंग

D⁠a f⁠o d⁠i⁠n⁠g r⁠u l⁠a⁠i m⁠i y⁠i⁠n x⁠i⁠u z⁠h⁠e⁠n⁠g l⁠i⁠a⁠o y⁠i z⁠h⁠u p⁠u s⁠a w⁠a⁠n x⁠i⁠n⁠g s⁠h⁠o⁠u l⁠e⁠n⁠g y⁠a⁠n j⁠i⁠n⁠g

शूरंगम सूत्र का पूरा चीनी नाम ‘दा फ़ो-दिंग रू-लाई मी-यिन श्योउ-झंग ल्याओ-यी झू पू-सा वान-शिंग शोउ लंग-यान जिंग’ है; लंग-यान जिंग उसी ग्रंथ का छोटा नाम है। पहले खंड के सत्रहवें अध्याय में पूरा नाम देकर समाधि की साधना और कामना छोड़ने का अंश उद्धृत किया गया है। इच्छा की पकड़ छूटने को वहाँ जन्म-मरण की निरंतरता से मुक्ति की साधना से जोड़ा गया है। लंबे शीर्षक में बुद्ध की शिक्षा, साधना का पूर्ण अर्थ और बोधिसत्त्वों की चर्या के संकेत साथ हैं। पूरे नाम और संक्षिप्त नाम को पहचान लेने पर आहार, संयम तथा मन की चर्चा में आए दूसरे उद्धरण भी उसी ग्रंथ से जुड़ते हैं। इस अंश का विषय गहरी मुक्ति-साधना है; गृहस्थों के विशेष आचरण की शर्तें पुस्तक के संबंधित प्रश्नोत्तर में दी गई हैं।

大智度论*第二卷 — दा झि-दू लुन · दी-अर ज्वान

D⁠a z⁠h⁠i d⁠u l⁠u⁠n · D⁠i e⁠r j⁠u⁠a⁠n

दा चि-दू लुन के साथ दूसरा खंड लिखा होने से उद्धरण का स्थान मिलता है। लुन व्याख्यात्मक बौद्ध ग्रंथ की पहचान है। पुस्तक का अंश धैर्य, प्रयास, शील, ध्यान और प्रज्ञा को कवच, घोड़े तथा धनुष-बाण जैसी छवियों से समझाता है। लेखिका इसे बाधाओं के बीच नियमपालन में दृढ़ रहने के प्रसंग में रखती हैं। युद्ध के परिचित उपकरण यहाँ साधना की शक्ति और निरंतरता व्यक्त करते हैं। पूरे ग्रंथ, उसके खंड और उससे चुनी गई उपमा के बीच संबंध इस नाम से खुलता है।

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