• प्रसव के बाद: स्रोत निश्चित रूप से कहता है कि दस से कुछ अधिक दिनों के भीतर उल्लंघन से स्त्री की मृत्यु और सौ दिनों के भीतर उल्लंघन से रोग होता है।
• मासिक धर्म के समय, जिसे स्रोत ‘त्येनगुइ का आना’ कहता है: उल्लंघन से ‘श्युए-मा’ (血麻证) नामक अवस्था और स्त्री-पुरुष दोनों को रोग होने का कथन है। ऐतिहासिक रोगनाम रखा गया है; कोई आधुनिक निदान नहीं गढ़ा गया।
• बाँस की चटाई: स्रोत बाँस की प्रकृति ठंडी बताता है और कहता है कि उस पर उल्लंघन करने से आसानी से ठंड लगती है।
• पतली रज़ाई: स्रोत कहता है कि उल्लंघन से ठंड हड्डियों में प्रवेश करती है।
• खिड़की की दरार से आने वाली हवा से बचने और देर रात सोने जाते समय संयम रखने को कहा गया है।
• संबंध अभी समाप्त हुआ हो और पास में शिशु रो रहा हो, तो स्रोत तुरंत स्तनपान न कराने को कहता है।
• संबंध के तुरंत बाद पंखा झलने तथा ठंडी चाय या ठंडा पानी पीने से मना किया गया है। स्रोत कहता है कि बहुत अधिक ठंड लगने से तुरंत मृत्यु भी हो सकती है।
• एक रात में दो बार संबंध बनाने से मना किया गया है।
• कामोत्तेजक नुस्खों और स्रोत की दृष्टि में अनुचित औषधियों के सेवन से मना किया गया है।
• वीर्य को रोककर बाहर न निकलने देने से मना किया गया है।