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कर्म, जीवन और भविष्य

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佛说帝释所问经 — फ़ो श्वो दी-शि स्वो-वेन जिंग

F⁠o s⁠h⁠u⁠o d⁠i s⁠h⁠i s⁠u⁠o w⁠e⁠n j⁠i⁠n⁠g

फ़ो श्वो दी-शि स्वो-वेन जिंग का शीर्षक देवता दी-शि द्वारा पूछे गए प्रश्नों से संबंधित सूत्र को पहचानता है। पुस्तक में इसका छोटा उद्धरण शील की उपेक्षा पर लज्जा और सुधार की आवश्यकता उठाता है। वह दा चि-दू लुन के साथ आता है और दोनों मिलकर साधना में दृढ़ता की भूमिका बनाते हैं। दी-शि का नाम देवताओं के परिचय में उपयोगी पारस्परिक संकेत है। इस सूत्रनाम में दी-शि प्रश्न पूछने वाले देवता हैं; पुस्तक के आरंभिक महल-प्रसंग में दी-शि तियान और तियान-दी के संबोधन भी मिलते हैं।

大宝积经 — दा बाओ-जी जिंग

D⁠a b⁠a⁠o j⁠i j⁠i⁠n⁠g

दा बाओ-जी जिंग एक बड़े सूत्र-संग्रह का चीनी नाम है। गर्भ में प्रवेश के प्रसंग में पुस्तक छप्पनवें खंड तथा उसके भीतर एक निश्चित हुई का पता देती है। उद्धृत अंश मध्यवर्ती चेतना, पहले के कर्म और अगले माता-पिता से बनने वाले संबंध को समझाता है। इस तरह पूरा संग्रह, खंड, उपदेश-समूह और उसका छोटा भाग एक क्रम में जुड़े हैं। यिन ल्यू वू छिंग आगे इसी जीवन-दृष्टि से अपनी नैतिक चर्चा बढ़ाती है। उद्धृत उपदेश-समूह का पूरा नाम फ़ो श्वो रू-ताई-ज़ांग हुई दी-शि-सि चि-यी है; यह संग्रह के भीतर चौदहवें हुई के पहले भाग को पहचानता है।

佛说入胎藏会第十四之一 — फ़ो श्वो रू-ताइ-ज़ांग हुई दी शि-सि झि यी

F⁠o s⁠h⁠u⁠o r⁠u t⁠a⁠i z⁠a⁠n⁠g h⁠u⁠i d⁠i s⁠h⁠i s⁠i z⁠h⁠i y⁠i

फ़ो श्वो रू-ताई-ज़ांग हुई दी-शि-सि चि-यी, दा बाओ-जी जिंग के उद्धृत भाग का विस्तृत पता है। “चौदह” इस उपदेश-समूह का क्रमांक है और चि-यी उसके पहले भाग की पहचान। विषय गर्भ में प्रवेश से पहले का मध्यवर्ती अस्तित्व है। उद्धरण में पुरुष के रूप में जन्म लेने वाली चेतना का माता की ओर आकर्षण और पिता की ओर विरोध, तथा स्त्री के रूप में जन्म लेने वाली चेतना की उलटी दिशा बताई गई है। ये प्रवृत्तियाँ उसी पूर्वगर्भावस्था और कर्मगत जुड़ाव की व्याख्या करती हैं।

优婆塞戒经 — योउ-पो-साइ ज्ये जिंग

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