हत्या हो और जीवन चला जाए तो सरकारी अधिकारियों को निरीक्षण के लिए बुलाना ही पड़ता है; फिर शव और हड्डियाँ खुली न हों, यह कैसे संभव? लोग पूछते हैं कि किस कुल का व्यक्ति दुराचार में मारा गया। उसके कुल और संबंधी भी मुँह दिखाने योग्य नहीं रहते।
पूछते हैं, किस घर की स्त्री है, जिसमें कोई शिक्षा नहीं? किस कुल का पुरुष है, जो घोड़े-बैल जैसा हो गया?
‘शिक्षा नहीं’ अर्थात पारिवारिक शिक्षा नहीं। ‘घोड़े-बैल जैसा’ अर्थात पशु के समान, मर्यादा, न्याय और लज्जा न जानना। लोग पूछें कि किस घर की स्त्री, किस कुल का पुरुष है, तो पूरा परिवार और कुल शर्म से भरता है।
कभी पेओनी भेंट करके और ऑर्किड चुनकर दोनों की निकटता और गहरी होती है।
कभी पेओनी फूल तोड़ना, कभी ऑर्किड चुनना और प्रेमी को गुप्त रूप से देना—काम इतना छिपाकर करना कि कोई न जाने।
यहाँ तक कि अपने पति को विष दिया जाता है और मृत्युदंड का अपराध ठहरता है।148
व्यभिचारिणी अपने अवैध साथी के साथ लंबे समय रहना चाहे तो अवश्य चुपके से विष खरीदकर अपने पति को मार डालती है। अपराध का प्रमाण उजागर होते ही अधिकारी नियम के अनुसार कड़ी कार्रवाई करके मृत्युदंड देते हैं, ताकि व्यभिचार के अपराध को दंडित किया जाए।
अंतिम मृत्युदंड ठहरता है; हुन आत्मा बिखरती और पो मिटते हैं।
हत्या के बदले प्राणदंड मिलता है और यौन अपराध अक्षम्य कहा गया है। न्यायाधीश सुनवाई करके मृत्युदंड तय करता है। निर्णय और घोषणा होते ही सभी की चेतना भय से बिखर जाती है और ऊर्ध्वगति कठिन हो जाती है।
पिता-पुत्र विलाप करते हैं, माँ-बेटी दुख सँभालती हैं; असंख्य लोग हँसते और धिक्कारते हैं। अब पश्चात्ताप से क्या होगा?