‘ह्वान’ प्रसन्नता, ‘यू’ आनंद और ‘क्वाइहुओ’ आराम है। स्त्री-पुरुष अवैध संबंध से खुश होते हैं, लेकिन केवल वर्तमान आराम देखते हैं और बाद की बर्बादी का ध्यान नहीं करते।
आधा जीवन दुर्दशा में; मृत्यु के बाद के पतन का क्या ज्ञान?
‘आधा जीवन’ आधा जीवनकाल है। ‘दुर्दशा’ कामों का अनुकूल न होना। ‘छिंग’ विनाश, ‘तुइ’ पतन। कामुक व्यक्ति का जीवन और प्रतिष्ठा अक्सर दोनों बर्बाद हो जाते हैं। जीवित रहते आधा जीवन असफल रहता है और मृत्यु के बाद संतानों में भी अवश्य परिवार का विनाश और प्राणहानि होती है।
या तो पूर्वजों के लिए धूप जलाने वाली वंशरेखा टूटती है, या संतति भिखारी बनती है।
संतान बुज़ुर्गों के धूपदान का आधार है। संतान समाप्त होने का अर्थ धूप की परंपरा टूटना है। अन्न माँगकर खाने वाला भिखारी है। कामुक व्यक्ति के वंशज हों भी तो वे अवश्य भिखारी हो जाते हैं।
या पत्नी-बेटियाँ ऋण चुकाती हैं, या संतान भाग्यहीन होती है।
‘चुकाना’ ऋण लौटाना है। आशय है कि कामुक व्यक्ति की पत्नी-बेटियाँ अवश्य उसके यौन दुराचार का खाता चुकाती हैं और स्वेच्छा से दूसरों के दुराचार को स्वीकार करती हैं। ‘भाग्यहीन’ अर्थात समय और भाग्य गिरना, हर बात बिगड़ना तथा चेतना और साहस खोना।
सुनसान कब्र का भटकता प्रेत—कौन कागज़ी मुद्रा जलाएगा?
मनुष्य मरकर प्रेत कहलाता है; मिट्टी का ढेर कब्र है। कामुक व्यक्ति परदेश में मरकर उजाड़ पहाड़ में दफ़न हो, अकेली कब्र का प्रेत बने, तो कौन उसके लिए कागज़ी मुद्रा जलाएगा और कागज़ चढ़ाएगा?
उच्छृंखल भोगी—कौन भोजन अर्पित करेगा?