‘छिन की अट्टालिका’ छिन राज्य का भवन, ‘छू का गृह’ छू राज्य का निवास है; दोनों वेश्याओं के रहने के स्थानों का संकेत हैं। किसान परिवारों के युवक वेश्यालयों की गलियों में डूबकर देर तक लौटना भूल जाते हैं और वसंत-शरद का ज्ञान नहीं रहता।
पैतृक संपत्ति बेचकर भोग-विलास का ऋण चुकाते हैं; माता-पिता का पूरा भरण-पोषण बंद हो जाता है।
‘बंद होना’ समाप्त होना है। ‘भरण-पोषण’ माता-पिता के भोजन का अन्न है। ‘ऋण’ उधार का खाता है। ‘भोग-विलास का ऋण’ वेश्याओं के साथ रहने में खर्च के लिए उधार लिया धन है। ऋण अधिक हो जाए तो सारी पैतृक संपत्ति बेचनी पड़ती है और माता-पिता के भोजन का अन्न भी बंद हो जाता है।
विवाह में पत्नी को मिले कपड़े-गहने गिरवी रखकर सुबह-शाम नशे और भरपेट भोजन में डूबते हैं; बच्चों के चूल्हे लंबे समय से खाली हैं।
‘गिरवी रखना’ धन के लिए वस्तु बंधक रखना है। ‘विवाह में पत्नी को मिले कपड़े-गहने’ उसके साथ विवाह में आए वस्त्र और आभूषण हैं। वेश्या के घर दिन-रात शराब और भोजन में डूबकर ये सारे कपड़े-गहने पहले ही गिरवी रख दिए जाते हैं। घर में चूल्हा जलना बंद होता है, पकाने को चावल नहीं और बच्चे भी ठंड तथा भूख सहते हैं।
सिरहाने का धन समाप्त; पापजनित रोग शरीर से लगे हैं।
‘सिरहाना’ तकिए के पास है। ‘धन समाप्त’ पैसा पूरा खर्च होना है। ‘पापजनित रोग’ वेश्यालय में लगा उपदंश, सूजाक, या अति कामभोग से रक्तवमन और क्षय जैसे रोग हैं जो शरीर के साथ रहते हैं। इन्हें अपने किए का पाप कहा गया है, इसलिए यह नाम है।152153
सड़क पर गिरा पड़ा है; रिश्तेदार और मित्र नाक ढकते हैं।
वेश्यागमन से विषैले घाव और अन्य पापजनित रोग लगें तो वेश्याएँ संपर्क रोककर उसे बाहर कर देती हैं। चल भी नहीं सकता, इसलिए सड़क पर गिरा रहता है। दुर्गंध असह्य होती है और वहाँ से गुज़रते सभी संबंधी-मित्र नाक ढकते हैं।
जीवन कुछ क्षण शेष है; पुराने परिचितों का हृदय दुखता है।