‘भूल’ गलती, ‘छुड़ाना’ वस्तु देकर वापस पाना, ‘जीवन भर’ पूरा जीवन। पहले एक गलत विचार से यौन अपराध किया, फिर जीवन भर भी पुराने पाप का मोल चुकाकर नरक के अशुभ फल से नहीं बच सका।
वह व्यक्ति यह दशा कैसे सहे?
‘वह व्यक्ति’ इसी मनुष्य को कहता है। ऐसे कामुक व्यक्ति की इस समय भावनाएँ कैसे सँभलें, उसका पश्चात्ताप कैसे परिणाम बदल दे?
खेद है उन पर जो दूर-दूर व्यापार करते और धन मिट्टी सा उड़ाते हैं।
‘व्यापार’ कारोबार है। सबसे घृणित बताए गए वे लोग हैं जो नदियों और झीलों के प्रदेशों में व्यापार करते हुए व्यभिचार तथा वेश्यागमन में सोना-चाँदी मिट्टी की तरह खर्च करते हैं।
वेश्या को साथ लेकर प्रणय करते हैं; रात लंबी या छोटी, इसकी परवाह कहाँ?
‘वेश्या’ देह-व्यापार करने वाली स्त्री है। उसे बाँह में लेकर शराब और हँसी से कामभाव भड़काते हैं और दिन-रात लौटते नहीं। रात कितनी लंबी है, यह सोचने का अवकाश कहाँ?
प्रेम-विलास में तृप्त होकर चाँद ढलना और कौओं की पुकार भूल जाते हैं।
‘आसक्ति’ लोभ से न छोड़ना है। ‘हवा के फूल’ हिलते आकर्षक फूलों की छवि है, जो कामलोभ उठाती है। चाँद ढलना और कौए बोलना भोर के संकेत हैं। केवल प्रेम-नींद और विलास, वेश्याओं के प्रति आसक्ति को सुख जानकर भोर होने को भूलते हैं और अलग नहीं होना चाहते।
घर-पड़ोस से लंबे बिछोह में मछली-पत्र कम भेजते हैं; दूरदेश में बसे रहने से जंगली हंस-संदेश भी कठिनाई से पहुँचता है।