‘पड़ोस’ कुल-संबंधियों और पड़ोसियों की गलियाँ हैं। ‘स्तंभ’ बड़ा अधिकारी है, राज्य के सहारे जैसा। क्षेत्र में ऐसा व्यक्ति हो तो हर घर को गौरव मिलता है। ‘योग्य’ अर्थात उस पद के अनुरूप होना।
आँगन में शुभ वनस्पति उगे; ऑर्किड और ओस्मैंथस सुगंध फैलाएँ।
‘आँगन के सामने’ सीढ़ियों के सामने है। ‘शुभ घास’ सुगंधित वनस्पति है। आँगन ऑर्किड और ओस्मैंथस के सुगंधित फूलों से भरता है; कहा गया है कि ऐसी दशा केवल धन-प्रतिष्ठा वाले घर में होती है।
द्वार के बाहर शुभ धूम उठे; छुन और श्युआन दोनों फलें।
‘शुभ धूम’ मंगलकारी ऊर्जा है। फलता छुन वृक्ष पिता के जीवित होने, समृद्ध श्युआन फूल माँ के होने का रूपक है। माता-पिता दोनों जीवित हों तो द्वार के बाहर अक्सर शुभ ऊर्जा घिरती है।
कारण खोजो तो इसका आधा संयम का फल है।
‘खोजना’ जाँचना है। कारण जाँचें तो अधिकतर ऐसे लोग यौन दुराचार नहीं करते; उसका स्रोत स्वाभाविक रूप से समझा जा सकता है।
लेकिन प्राचीन काल से कामुक लोगों की कमी भी नहीं।
‘कमी नहीं’ अर्थात कम नहीं। प्राचीन काल से कामासक्त लोग बहुत रहे हैं।
श्या के जिए अधर्मी थे, मेइशी को लाड़ देकर राज्य खोया; शांग के झोउ निर्दयी थे, दाजी के प्रेम में राजसत्ता नष्ट की।