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परलोक के अटल विधान

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विषय-सूची

‘कमल-सरोवर’ मंदिर का कमलों वाला ताल है, पवित्र स्थान। भिक्षु-दाओवादी साधु यहाँ यौन दुराचार करें तो शुद्ध पवित्र भूमि अवश्य दूषित होती है। स्वर्गीय देव क्रुद्ध कैसे न हों?

पाप-सागर में डाल दिए जाते हैं, लंबे पतन में डूबते हैं।

‘पाप-सागर’ दुख-सागर है। ‘सदा’ दीर्घकाल, ‘गिरना’ पतन, ‘डूबना’ जलमग्न होना। भिक्षु-दाओवादी साधु कमल-सरोवर दूषित करें तो देव उन्हें नरक के दुख-सागर में डालेंगे; लंबे समय डूबे रहेंगे और ऊर्ध्वगति नहीं पाएँगे।

नरक-द्वार पर भिक्षु और दाओवादी साधु बहुत हैं—क्या यह झूठ है? क्या यह विश्वास योग्य नहीं?

‘नरक’ परलोक की जेल है। पुरानी उक्ति है कि नरक-द्वार पर दंड भोगने वालों में भिक्षु-दाओवादी साधु बहुत हैं। यह कथन मिथ्या नहीं और घटना अधिक विश्वास योग्य लगती है।

हाल के समय में विदेशी हवा और नया चलन मध्यभूमि में घुसे हैं।

‘हाल’ पिछले कुछ वर्ष। ‘विदेशी हवा’ पश्चिम की हल्की, उच्छृंखल रीति, ‘नया चलन’ फैशनेबल वस्तुएँ, नई लहर जैसा है। ‘घुसना’ आक्रमण, ‘मध्यभूमि’ चीन की भूमि। आशय है कि हाल में पश्चिम की हल्की और उच्छृंखल बुरी रीति चीन आई और हमें बड़ी हानि पहुँची।

स्त्री-पुरुष रूप बदलते हैं, वस्त्र विचित्र हैं, सत्यनिष्ठा और लज्जा छोड़ दी गई।

‘रूप बदलना’ रूप अलग होना, ‘विचित्र’ बेमेल अजीब पोशाक है। स्त्री-पुरुष अपने निष्ठावान और शीलवान मूल रूप को बदलकर अजीब कपड़े पहनते हैं, मनुष्य जैसे नहीं लगते और मान-लज्जा की परवाह नहीं करते।

कुछ अंग-प्रदर्शन से ध्यान खींचते, अव्यवस्थित प्रेम से पाप बोते और विवाह से पहले कौमार्य खोते हैं।

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