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परलोक के अटल विधान

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विषय-सूची

‘हटना’ अलग होना और ‘दूर भटकना’ दूर तक चले जाना है। सूत्र पालन से हर क्षण न भटको या इसे न छोड़कर सुबह-शाम पढ़ो, तो मैं तीन प्रचुरताओं का आशीर्वाद दूँगा: अधिक पुण्यफल, अधिक आयु और अधिक पुत्र। यह हुआ के सीमा-रक्षक द्वारा याओ को दिया आशीर्वाद है।

सुंदर जेड सा निष्कलंक हो तो त्येनताई से तुम्हें लेने आना निश्चित है।

‘सुंदर जेड’ अच्छा रत्न, ‘निष्कलंक’ दोष या दरार न होना। त्येनताई अमरों का निवास है। संसार के स्त्री-पुरुष यौन दुराचार न करें तो निष्कलंक जेड हैं। पुण्य-सद्गुण पूर्ण होने पर अमर और बुद्ध उनका स्वागत करके साथ परम आनंदलोक में ले जाएँगे।

निर्मल रहकर स्वयं भलाई चाहो तो परलोक से स्वागत निश्चित है।

‘निर्मल’ जल जैसा साफ़, ‘भलाई चाहना’ अच्छे को अपनाने और बुरे को हटाने का मन है। ऐसा व्यक्ति मृत्यु के बाद परलोक पहुँचे तो प्रत्येक सभागृह के यमराज आसन छोड़कर स्वागत करेंगे।

जल, आग, तलवार और युद्ध से पूरा परिवार बचे; कीट, टिड्डी और महामारी गुप्त रूप से मिटें।

‘गुप्त मिटना’ अदृश्य रूप से समाप्त होना है। सूत्र पालन करने वाला जल, आग, तलवार और युद्ध की विपत्तियों से बचेगा; कीट, टिड्डी और महामारी भी साथ मिटेंगी।163

मुड़कर कामुक उन्मत्तों को देखो।

‘मुड़कर देखना’ पीछे नज़र डालना है। ‘उन्मत्त’ कामुक और उद्दंड युवक है।

नेत्रहीन और बधिर होना निश्चित ही पिछले जन्म के भारी पाप से है।

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