‘पाप’ अपराध, ‘पिछला जन्म’ पहले का जीवन। आँख से न देख सकना नेत्रहीनता, कान से न सुन सकना बधिरता है। पाठ कहता है कि पिछले जन्म के अत्यधिक अपराधों के कारण इस जन्म में ऐसा फल मिलता है।164
लंगड़े पैर और कटे हाथ अवश्य पिछले जन्म के गहरे कर्म-ऋण हैं।
कहा गया है कि पिछले जन्म के अन्याय और पाप भारी होने से इस जन्म में विकलांगता होती है।
ठंडे मंदिर में उदासी, न कपड़ा न भोजन; टूटी भट्ठी में दयनीयता, भूख और सर्दी।
इतना ही नहीं, ठिकाना नहीं और दिन का भोजन कठिन है। ठंडे मंदिर में आश्रय और टूटी भट्ठी में विश्राम लेकर असीम कष्ट भोगता है। क्या इसे पिछले जन्म की कामुकता का फल न कहें?
चरम गरीबी और जीवन-दुर्दशा में पश्चात्ताप कहाँ से हो?
‘चरम गरीबी’ अंतिम दरिद्रता, ‘दुर्दशा’ जीवन न चल पाना। ‘पश्चात्ताप’ पाप और गलती पर खेद है। यहाँ पहुँचा व्यक्ति पुराने जन्म का फल या पूर्वजों के छोड़े पाप भोगता है। पछताना चाहे भी तो नहीं कर पाता; शुरुआत कहाँ से करे?
तुम चीन में जन्मे-पले हो, अनीति वाले बाहरी लोगों जैसे नहीं।
‘तुम सब’ तुम्हीं, ‘जैसे नहीं’ समान नहीं। ‘चीन’ मूल पाठ में ‘मध्यभूमि’ कहलाता है। ‘मान-यी’ यहाँ उन स्थानों के लिए है जहाँ नैतिक संबंध और सदाचार न जाने जाते हों। आशय है कि चीन में जन्मे और पले हो तो उन असभ्य स्थानों के लोगों की तरह मर्यादा और न्याय से अनजान मत बनो।
इन्हें दर्पण बनाकर सादगी और सत्य की ओर क्यों न लौटो?