‘दर्पण’ आईना, ‘सादगी’ निर्मल सरलता, ‘सत्य’ सही मार्ग है। ऐसे लोगों को आईना बनाकर स्वयं को देखो और सरलता तथा सही मार्ग में लौटो।
ये औषधि-समान वचन मानक डोरी जैसे अपनाने चाहिए।
‘औषधि-पाषाण’ रोग का उपचार करने वाली वस्तु, ‘मानक डोरी’ कारीगर का सीध और समतल जाँचने का साधन है। इस संयम-सूत्र का हर वचन अच्छा है, कामुक मन के रोग का उपचार कर सकता है और सीध बताने वाली डोरी जैसा है।
हर अक्षर मोती है; ऊँची सूनी अटारी में कैसे छोड़ दें?
‘मोती’ मोती और अकीक जैसी बहुमूल्य चीज़ें हैं। ‘रखना’ संग्रह, ‘ऊँची अटारी’ बड़ा खाली भवन जहाँ लोग न जाएँ। सूत्र का हर अक्षर रत्न की तरह बहुमूल्य और तन-मन के लिए हितकारी है। इसे अनुपयोगी मानकर खाली भवन में रख देना और न पढ़ना न मनन करना कैसे उचित?
मैं अल्पज्ञ होकर भी वेदी पर उतर उपदेश देता हूँ, ताकि भ्रमित लोग जागें।
‘छोड़ना’ उपदेश दे जाना है। सम्राट कहते हैं: प्रतिभा-ज्ञान कम होने पर भी आज दैवी लेखन की वेदी पर यह सूत्र देकर लोगों को सिखाता हूँ। उद्देश्य है कि अच्छे वचनों से स्त्री-सौंदर्य में भ्रमित लोग जागें और जल्दी लौटें।
कोई साथ रखकर हृदय में याद करे तो मैं पुण्यफल और आयु बढ़ाऊँगा।
साथ धारण करना ‘पेइफ़ू’, मन में दृढ़ स्मरण ‘झीशिन’ है। सूत्र साथ रखे, सावधानी से मन में याद रखे और हर क्षण न छोड़े, तो मैं उसकी रक्षा कर पुण्य-प्रज्ञा बढ़ाऊँगा और आयु लंबी करूँगा।
कोई बोलकर समझाए और उँगली से दिखाए तो मैं अपराध काटकर दोष मिटाऊँगा।