कोई सूत्र बोलकर दूसरों को सुनाए और उँगली से दिखाकर पढ़ाए, तो उसने पहले यौन अपराध, दोष और कर्म-ऋण किए हों भी, मैं अभिलेख से सब काटकर मिटा सकता हूँ और उसके नया बनने का मार्ग खोल सकता हूँ।
मेरे कथन को निराधार न मानो तो लिंगश्याओ में मैं आभारी हूँ।
‘निराधार बात’ प्रमाणहीन कथन है। लिंगश्याओ सम्राट के निवास-प्रासाद का नाम है। वे कहते हैं: मेरे संयम-सूत्र को निराधार न समझो तो लिंगश्याओ रत्न-प्रासाद में मैं भी तुम्हारा आभार मानूँगा।
यदि मेरे कथन को अनुचित मत न मानो, तो स्वर्ण-प्रासाद में मैं तुम्हारे दोषों की भरपाई करूँगा।
‘अनुचित मत’ गलत विचार, ‘स्वर्ण-प्रासाद’ सर्वोच्च सम्राट का निवास, ‘भरपाई’ भूल की पूर्ति है। मेरा सूत्र गलत न मानो तो, यद्यपि सर्वोच्च सम्राट लोगों के बुरे मन से बार-बार विपत्तियाँ भेजते हैं, मैं स्वर्ण-प्रासाद में तुम्हारे दोष सँभालकर विपत्तियाँ घटाऊँगा या उनसे मुक्ति दिलाऊँगा।
अर्थ पूर्ण सूक्ष्म या स्पष्ट न हो तो प्रतिभाशाली लोगों से सुधार की आशा है।
संयम-सूत्र के विचार कहीं पर्याप्त सूक्ष्म या स्पष्ट न हों, तो ज्ञानी-प्रतिभावान लोग मेरे लिए जाँचकर सुधारें, ताकि वह अधिकतम अच्छा और पूर्ण हो।
शब्द पूरी तरह शुद्ध-सुगठित न हों तो प्रसिद्ध विद्वानों से समीक्षा की प्रार्थना है।
‘शब्द-विन्यास’ सूत्र की वाक्य और शब्द-रचना है। कहीं पूरी तरह परिपक्व और सुंदर न हो तो दूर-पास के प्रसिद्ध साहित्यकार-विद्वान समीक्षा करें और सुधार भी करें, ताकि पूर्णता आए।
ओ संसार के लोगो! सुबह-शाम धूप जलाकर मेरा ताओयुआन ग्रंथ पढ़ते, प्रातः-संध्या साष्टांग प्रणाम करके मेरे हृदय-रक्त के उपदेश पढ़ते हो।