काँच के कमरे का प्रसंग
काँच के कंप्यूटर का नरक इसी वाणी के प्रभाव को अलग-अलग पारदर्शी कमरों में दिखाता है। यह झूठी वाणी वाले नरक-क्षेत्र का भाग है और प्रत्येक प्राणी अपने छोटे कमरे में है। बाईं ओर अधिकांश कंप्यूटर लाल तथा दंड का क्रम तेज़ है; दाईं ओर सभी काले हैं और क्रम धीमा है। एक स्त्री लाल स्फटिक के यंत्र से निकलती हरी रोशनी और ध्वनि की ओर खिंचती है। पास आने पर काँटों वाला छोटा लाल साँप उसकी जीभ पकड़ता है, फिर यंत्र टूटकर उसके शरीर को चोट पहुँचाता है। काले यंत्र से धूसर-काला प्रकाश और काली कनखजूरी निकलती है; शेष दंड वैसा ही, किंतु धीमा है। स्त्री कहती है कि वह कंपनी और मित्रों के बीच यौन चुटकुले सुनाती, शरीर की प्रशंसा चाहती और घटनाएँ बढ़ाकर दूसरों को डराती थी। घर में चारों ओर दर्पण थे; वह नग्न घूमती और महिला मित्रों को शरीर दिखाने बुलाती थी। उसके व्यवहार से प्रभावित कुछ नए युवा कर्मचारी अनुचित कामाचार में पड़े। इस मामले में उसे पाँच सौ वर्ष मिले। उसने जिसे केवल मनोरंजन समझा था, निर्णय में उसका दूसरों तक पहुँचा हुआ प्रभाव सामने आया।
तुरंत और धीरे पड़ने वाला असर
दो प्रकार के यंत्रों की गति का अंतर न्यायाधिकारी पहले की वाणी के असर से समझाते हैं। कुछ शब्द किसी को तुरंत चोट पहुँचाते हैं; कुछ धीरे-धीरे उसकी अच्छी मनोवृत्ति को डगमगाते हैं। उसी के अनुरूप इस दृश्य में फल अनुभव करने की गति तेज़ या धीमी है। जीभ की पीड़ा अकेली घटना नहीं रहती: आकर्षित करने वाला प्रकाश दिखाई देता है, ध्वनि सुनाई देती है और उसके बाद पूरा शरीर कष्ट अनुभव करता है। छह आधारों से जुड़े फल की पृष्ठभूमि यहाँ अधिक स्पष्ट हो जाती है। स्त्री को न्यायाधिकारी अपने विचार और व्यवहार की जाँच करने को कहते हैं। उसके लिए ‘मैं सबको प्रसन्न करना चाहती थी’ से आगे देखना आवश्यक है: बात क्यों कही, किस तरह कही, किसने सुनी और उसके बाद किस आचरण को बल मिला। स्वीकार का यह विस्तार सुधार को भी ठोस बनाता है। वही वाणी, जिसके द्वारा पहले हानि पहुँची थी, आगे सत्य, संयम और दूसरों के हित का अभ्यास बन सकती है।
मन में जुड़ती हुई छवियाँ
दंडस्थल में BLX के संक्षिप्त नाम से आया प्रसिद्ध गायक किसी को याद कर रहा है। तभी मनुष्य के आकार का एक वृक्ष सामने आ जाता है। गायक उस वृक्ष का हाथ पकड़कर उसके करीब जाना चाहता है। वृक्ष उसे डालियों और पत्तों से बाँधकर सिर पर प्रहार करता है, जब तक गायक अचेत न हो जाए। फिर वृक्ष के पत्तों से गायक की ओर हवा का झोंका आता है, जिससे गायक का शरीर धीरे-धीरे पहले जैसा होने लगता है। इसके बाद वृक्ष चला जाता है। वैसी कामना दोबारा उठे तो क्रम फिर शुरू होता है। न्यायाधिकारी इच्छा उठने और दंड मिलने के अंतराल को जोड़ते हैं: कामना जितनी शीघ्र और तीव्र लौटती है, फल उतनी बार आता है। एक विचार से दूसरे विचार या चित्र का खिंच आना चीनी में ‘लियान-शियांग’ (联想) है। इसी नाम के नरक में यह मानसिक संबंध दिखाई देने वाली घटना बन गया है। वृक्ष का चले जाना एक बार के क्रम का समाप्त होना है; मन की आदत बनी रहे तो वह फिर सामने आएगा। इसलिए उस स्थान से निकलने की शर्त मूल उत्तर में संबंधित इच्छा का पूरी तरह शांत होना है। दृश्य बार-बार किसी चाह में टिकने और उससे जुड़ा रूप अनुभव में आने का संबंध बहुत सीधे ढंग से रखता है।
प्रसंग में दिए गए अलग नियम
मूल सत्ताईसवें अध्याय में यह दृश्य समलैंगिक संबंधों की पान-ग्वान की धार्मिक व्याख्या का भाग है। वे इन्हें अनुचित कामाचार में रखते हैं और सामान्य अवधि पाँच सौ वर्ष बताते हैं। अन्य संबंधित अनुचित कामाचार भी हुआ हो तो दूसरे नरकों में आगे का दंड है। उनकी पूर्वजन्म संबंधी व्याख्या में कई जन्मों तक स्त्री रहने के बाद पुरुष के रूप में जन्म लेने पर भी सोच और प्रेम का आकर्षण पुराने अभ्यास से पुरुषों की ओर रहता है; स्त्री शरीर में उलटी स्थिति भी इसी तरह समझाई गई है। फिर वे ऐसे लोगों की विशेष दशा बताते हैं जो केवल साथ जीवन बिताने का साथी चाहते हैं, एक-दूसरे को पति-पत्नी की तरह संबोधित करते हैं और अन्य अनुचित कामाचार नहीं करते। इसके लिए पचास नरक-वर्ष हैं। उस समय संबंधित इच्छा के बीज पूरी तरह मिट जाएँ तो पहले निकल सकते हैं; बने रहें तो तीस वर्ष और जुड़ते हैं। आगे प्रश्नोत्तर विचार को पारंपरिक चीनी शरीर-भाषा से जोड़ता है। ‘चेन-ची’ (真气) शरीर की जीवन-शक्ति और ‘चंग-ची’ (正气) उसकी शुद्धता तथा संतुलन पर जोर देता है। पान-ग्वान कहते हैं कि अनुचित कामना उठने पर चेन-ची में हलचल और चंग-ची में क्षय होता है। यह पूरा उत्तर अपनी विशिष्ट श्रेणियों के भीतर आदत के बने रहने, लौटने और उसके शांत होने की शर्तें बताता है।
लेखक के बाद भी चलने वाला प्रभाव
रचयिता अपनी कृति से विदा हो सकता है, पर कृति बाद के लोगों को प्रभावित करती रहती है। पुस्तक के एक अध्याय का शीर्षक पश्चिमी हान काल के उन्नीस सौ वर्ष से भी अधिक पुराने कामुक चित्रों के रचयिता के अब तक दंड में रहने का उल्लेख करता है। इसके बाद पुस्तकों, चित्रों, फिल्मों और संबंधित पदार्थों के चलते रहने वाले असर का विस्तार है। न्यायाधिकारी वास्तविक भागीदारी के अनुसार लेखक, मुद्रक, अभिनेता, निर्माण-सहयोगी, विक्रेता और वेबसाइट चलाने वाले को गिनते हैं। शुल्क लिया जाए या सामग्री मुफ्त दी जाए, वह लोगों तक पहुँचती है। कुछ उत्तर निश्चित अवधि बताते हैं; कुछ में सामग्री का मानव-लोक से पूरी तरह मिटना शर्त है। वेबसाइट के मामले में उसके बेचे हुए अश्लील वीडियो की सभी प्रतियों का मानव-लोक से पूरी तरह मिटना और संबंधित वेबसाइट का पूरी तरह बंद होना—दोनों शर्तें साथ रखी गई हैं। अध्याय यह भी कहता है कि वास्तविक अवधि का पूरा ज्ञान बुद्ध-बोधिसत्त्वों को है। भूमिका, किए हुए काम और प्रभावित क्षेत्र का विवरण इसलिए साथ रहता है। रचना लेखक के बाद कैसे चलती है, यह उसके उत्तरदायित्व का भाग बनता है, और प्रसार रोकना सुधार की व्यावहारिक कार्रवाई में आता है।