Shou leng yan jing
शोउ-लंग-यान जिंग, शूरंगम सूत्र का एक संक्षिप्त चीनी नाम है; लंग-यान जिंग भी उसी ग्रंथ का नाम है। यह प्रकाशमय स्वर्ग के प्राणियों के पृथ्वी पर आकर भोजन करने वाले संवाद में आता है। पान-ग्वान अन्न खाने के बाद पैरों के धरती से जुड़े रहने वाली पंक्ति उद्धृत करते हैं। इसके साथ वे स्वाद के आकर्षण, आसक्ति और शरीर के भारी होने की बात समझाते हैं। सूत्र की छोटी पंक्ति इस लंबे संवाद में मन के आकर्षण और उसके बाद होने वाले परिवर्तन को समझाने का आधार बनती है। पूरे चीनी सूत्रनाम का परिचय HI-T10 में है।
洞冥记 — दोंग-मिंग जी
Dong ming ji
दोंग-मिंग जी का नाम परिशिष्ट की टिप्पणी में दंड, पश्चात्ताप और अगले जन्म की चर्चा के प्रमाण-संदर्भ के रूप में आता है। वहाँ अलग दंडस्थलों से गुजरने और जीवन रहते सुधरने से फल हल्का होने की बात कही गई है। इस उल्लेख में लेखक और संस्करण का विस्तृत परिचय नहीं दिया गया है। इसी अनुच्छेद में ज्ये (劫) का एक प्रयोग नरक में एक बार दंड भोगने के लिए और दूसरा एक बार जन्म लेने के लिए समझाया गया है। ये अर्थ उसी टिप्पणी में दंड और पुनर्जन्म के प्रसंग को स्पष्ट करते हैं।
金科辑要 — जिन-के जी-याओ
Jin ke ji yao
जिन-के जी-याओ परिशिष्ट में शुभ कर्म के पुरस्कार और अशुभ कर्म के दंड का नियमसंग्रह है। उसमें छूट, बढ़ोतरी और एक फल का दूसरे से समायोजन जैसे भेद बताए जाते हैं। अगली टिप्पणी उसके प्रकट होने की कथा रखती है: श्येन-फ़ंग के छठे वर्ष वेन-छांग ली-लिंग में उतरे और स्वर्गीय आदेश से मानव-लोक में पाठ दिया गया। उसे स्वर्गीय नियम समझाने वाला और यांग-ल्यू भी कहा गया है। दिव्य उद्गम की यह कथा और मनुष्यों में लिखित प्रसार, दोनों इसी पाठ की प्रस्तुत पहचान का हिस्सा हैं।
轮科辑要 — लुन-के जी-याओ
Lun ke ji yao