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《阴律无情》文化导读 · HI

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章节目录

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| म्याओ-चंग की हस्ताक्षरित प्रस्तावना | प्रस्तावना त्रिरत्न के शिष्यों को संरक्षण और आचरण के लिए प्रेरित करती है। उसमें लोकहित के पुण्य का समर्पण, देवलोक में उठना, शुद्ध भूमि का उच्च पद और पूर्वजों का हित साथ आते हैं। | प्रस्तावना-लेखक की ओर से समर्थन का निमंत्रण और फल का कथन; S⁠1 L⁠0⁠0⁠4⁠4⁠–⁠0⁠0⁠4⁠8। तिथि का मूल रूप 岁次壬辰 रखा गया है। |

| तियान-दी का उत्तर | पाठकों को दोबारा छपवाकर प्रसार करने का प्रोत्साहन; उनके शुभ संकल्पों में सहायता के लिए उनसे संबंध रखने वाले देव भेजने का कथन। | शुभ संकल्प, प्रसार और संबंधित सहायक कारण इस वचन में साथ हैं; S⁠1 L⁠0⁠0⁠8⁠9। |

| अंत में पाठक की पुस्तक-दान संबंधी गवाही | पाठक वितरण-स्थल से पुस्तक लेने और लेखिका के ब्लॉग तथा 善心莲心正法生活网 से संपर्क की बात कहता है। वह इस पुस्तक के निःशुल्क प्राप्त होने, अन्य ग्रंथों सहित तीन पेटियाँ मँगवाने और स्थानीय क्षितिगर्भ-साधना स्थल पर देने का वर्णन करता है। | यह उसके पुस्तक प्राप्त करने और दान करने का अनुभव है। आगे वह स्वप्न और अपनी प्राप्ति का अर्थ बताता है। वेबसाइट और वितरण-मार्ग उसी अनुभव के नाम हैं। S⁠1 L⁠1⁠8⁠0⁠9⁠–⁠1⁠8⁠1⁠2। |

| प्रसार और आचरण | विषय समझना, अपना उद्देश्य शुभ रखना, जरूरत रखने वाले तक शिक्षा पहुँचाना और अपने व्यवहार में भलाई करना—इन संबंधों से अध्याय धर्म-दान समझाता है। फल के प्रत्येक कथन के साथ उसका वक्ता और बताई गई शर्त आती है। | S⁠7⁠-⁠1⁠4, S⁠7⁠-⁠1⁠8, S⁠7⁠-⁠1⁠9; लोगों की संख्या और आयु-गणना R⁠7⁠-⁠C⁠I⁠R⁠C⁠U⁠L⁠A⁠T⁠I⁠O⁠N में। |

अध्याय 4

परिवार, संबंध और जन्मों तक चलने वाली करुणा

परिवार में कर्म और उत्तरदायित्व

परिवार में सहायता का क्रम उम्र के साथ बदलता रहता है। आरंभ में बच्चा दूसरों के हाथों पलता है; आगे चलकर वही व्यक्ति किसी छोटे को सिखाता है, किसी बीमार की देखभाल करता है या बूढ़े माता-पिता का सहारा बनता है। भोजन और रहने की जगह के साथ भाषा, शिक्षा और कठिन दिनों में मिला साथ भी इसी संबंध का हिस्सा हैं। चीनी नैतिक विचार में इन उपकारों को याद रखना पारिवारिक जीवन की बुनियाद है। यिन ल्यू वू छिंग की चर्चा इस परिचित अनुभव से आगे जाती है: वह परिवार के संबंधों को पिछले जन्मों से आया हुआ मानती है और दिवंगत परिजनों तक उनके बने रहने की बात करती है। इसलिए उसकी चिंता में जीवित बुज़ुर्ग की सेवा और पूर्वज के कल्याण की प्रार्थना, दोनों आते हैं। आज परिवार में मिला स्नेह पुराने संबंध को सँभाल सकता है; आज की कठोरता उसमें नया दुःख भी जोड़ सकती है। धैर्य से बात सुनना, अपनी कटुता मान लेना और काम में हाथ बँटाना उसी घर के भीतर किया जा सकने वाला सुधार है।

बुज़ुर्ग की थाली समय पर रख देना, उनके आराम की व्यवस्था करना या कोई परेशानी सुनने के लिए ठहर जाना—सेवा का बड़ा हिस्सा ऐसे छोटे कामों में दिखाई देता है। माता-पिता के पालन-पोषण का आदरपूर्वक प्रत्युत्तर चीनी में ‘श्याओ’ (孝, मातृ-पितृभक्ति) कहलाता है। इसमें उनकी आवश्यकता समझना और अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाना भी आता है। इसी तरह गुरु के प्रति कृतज्ञता उस ज्ञान और मार्गदर्शन को याद करती है जिससे जीवन सँभला। उपकार की पहचान धीरे-धीरे घर से बाहर भी पहुँचती है। अन्न की चर्चा में न्यायाधिकारी माता-पिता के साथ किसान और प्रकृति का स्मरण करते हैं: भूमि, पानी, धूप और खेती के श्रम से भोजन मिलता है। उसे आदर से ग्रहण करना और व्यर्थ नष्ट होने से बचाना उन सहायताओं का मान रखना है। परिवार की सेवा और अन्न का सम्मान इस अर्थ में जुड़े हैं कि दोनों में व्यक्ति देखता है कि उसका जीवन कितनों के योगदान से चल रहा है। यह पहचान उसे अपने श्रम और साधनों से दूसरों की सहायता करने की ओर भी ले जाती है।

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