| पो, 魄 | देह और उसके सजीव रूप से जुड़ा पक्ष। ली ची में देह-पो धरती से संबद्ध है; शिक्षा मंत्रालय का शब्दकोश शिंग-पो का अर्थ शरीर देता है। | R04-SUP-03, R04-SUP-04 |
| तीन हुन, सात पो | तीन और सात इस पारंपरिक जीवन-शब्दावली की संख्याएँ हैं। मूल अध्याय 10 में मानवीय आयु शेष रहते और शरीर मानव-लोक में होते हुए चेतना के कुछ अंश तथा तीन हुन अधोलोक ले जाए जाने का वर्णन है। | S1 L0262; R04-SUP-05 |
| शन-शि और लिंग-थी, 神识、灵体 | शन-शि चेतना और पहचान पर बल देता है। लिंग-थी देह से अलग या मृत प्राणी के दिखाई देने वाले रूप का नाम है। जीवित रहने, आयु समाप्त होने या प्रकट होने की दशा संबंधित अनुच्छेद बताता है। | S1 L0262, L0475, L1001 |
| बुद्ध-प्रकृति, 佛性 | प्राणियों में जागृति की संभावना का आशय; यह सभी संवेदनशील जीवनों के प्रति करुणा से जुड़ता है। | R04 HI-007 की चीनी बौद्ध पृष्ठभूमि; मूल प्रकाश का कथन S1 L0607 |
| मूल प्रकृति और जन्मजात प्रकाश, 自性、先天光明 | पुस्तक आदतों से मूल निर्मलता के ढकने को अधोगति से और मन को स्वच्छ करके भलाई करने को उसकी पुनः प्राप्ति से जोड़ती है। | S1 L0087, L0607, L0753–0755 |
| अनात्म | बौद्ध विवेचन रूप, वेदना, संज्ञा, संस्कार और विज्ञान की परिवर्तनशीलता तथा परिस्थितियों पर निर्भरता से शरीर और अनुभव समझाता है। SN22.59 इन पाँच स्कंधों में अनित्य और अनात्म का विवेचन करता है। | R04-SUP-07; हुन-पो की शब्दावली के साथ अलग आशय में परिचय |
| निरंतरता और स्मृति | निरंतरता पहले और आगे के जीवन में कर्म तथा परिस्थितियों के संबंध को बताती है। मेंग पो का प्रसंग पुराने लोगों और घटनाओं की स्मृति मिटने का है; नए जीवन में पुराने कर्मों से बने संबंध आगे खुलते हैं। | मूल मेंग पो प्रसंग; S5-11, S5-12, S5-16 |
| मूल और अलग पंजीकृत निवास, 原籍、分籍 | मूल पंजीकरण पुराने घर और संबद्धता से, अलग पंजीकरण बाद में दूसरी जगह बसने से जुड़ता है। तियान-दी इस चीनी सामाजिक भाषा से स्वर्गीय मूल निवास, मानव-लोक और निचली गतियों में बसना तथा सत्कर्म से घर लौटना समझाते हैं। | S1 L0087–0089; सामाजिक शब्दों का सांस्कृतिक स्पष्टीकरण |
अध्याय 3
विचार, वाणी और उनके दूर तक जाने वाले फल