किसी नियम को व्यवहार में निभाते समय छोटी बात भी निर्णायक हो सकती है—वस्तु किससे बनी है, उसका उपयोग स्वाद के लिए है या आपात औषधि के लिए, और किसी संबंध में दूसरे की स्थिति क्या है। इस अध्याय के शरीर-विषयक शब्द, समय की गणना और आहार की मर्यादाएँ इन्हीं बातों को स्पष्ट करते हैं। शरीर की देखभाल से काम करने की सामर्थ्य बनी रहती है; संयम उस सामर्थ्य के उपयोग को दूसरों के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ता है। व्रत और स्मरण-दिन नियमित अभ्यास के अवसर देते हैं, जबकि परिवार और दूसरे जीव रोज़ उसके लिए अवसर उपस्थित करते हैं। भोजन में करुणा, संबंध में ध्यान और जरूरत पड़ने पर सेवा, सभी में भीतर का भाव काम का रूप लेता है। आदर की भी ऐसी ही दृश्य अभिव्यक्तियाँ हैं: पूर्वज के नाम अर्पण, शिक्षक को प्रणाम और बुद्ध-बोधिसत्त्व के सामने झुकना। इन चीनी उपासनाओं के नाम और रूप समझते समय भी यह देखना उपयोगी है कि श्रद्धा किसके प्रति है और उससे कौन-सा संबंध निभाया जा रहा है।
संदर्भ सारणियाँ
तीन रत्नों के दो समूह और संबंधित शब्द
| पद | इस प्रसंग का अर्थ | संदर्भ |
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| 精 जिंग | जीवन का सूक्ष्म आधार और संचय | शरीर के तीन रत्न |
| 气 ची | जीवन की शक्ति, संचालन और गति | शरीर के तीन रत्न |
| 神 शेन | चेतना, मानसिक सजगता और स्पष्टता | शरीर के तीन रत्न |
| बुद्ध, धर्म, संघ | जागृत शिक्षक, शिक्षा और मार्ग, साधक समुदाय | बौद्ध शरण के तीन रत्न |
| प्राण | भारतीय शरीर-विचार में जीवन-श्वास अथवा जीवन-शक्ति | ची के कुछ पक्षों से तुलना |