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《阴律无情》文化导读 · HI

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इतिहास से धार्मिक आदर्श तक

निष्ठा और न्याय के लिए याद किया गया कोई ऐतिहासिक व्यक्ति आगे की धार्मिक परंपरा में पूज्य देवता का रूप पा सकता है। चीनी ‘ग्वान यू’ (关羽) इसी प्रकार का परिचित उदाहरण हैं। वे हान राजवंश के अंतिम दौर के सेनापति थे; उनकी निष्ठा और न्यायशीलता की स्मृति बाद में ‘ग्वान दी’ (关帝) और ‘ग्वान शंग दी जुन’ (关圣帝君) जैसी उपाधियों से जुड़ी। लोक, दाओवादी और बौद्ध उपासनाओं में उनकी अलग भूमिकाएँ मिलती हैं। पुस्तक उनके देव-नाम से प्रचलित काम-संयम के उपदेश उद्धृत करती है। एक दूसरे धर्मोपदेश में वक्ता ‘वेन छांग दी जुन’ (文昌帝君) हैं, जिनका संबंध विद्या, साहित्यिक उपलब्धि और परीक्षा-सफलता से है। इतिहास का सेनापति, बाद का सम्मानित धार्मिक नाम और उस नाम से प्रसारित सदाचार-ग्रंथ, यहाँ क्रम से पहचाने जा सकते हैं। किसी नाम के साथ उसके उपदेश को पढ़ने पर चरित्र का महत्त्व भी खुलता है: निष्ठा केवल प्रशंसा का शब्द नहीं रहती, वह अपने काम में जिम्मेदारी निभाने तथा इच्छा के सामने मर्यादा बनाए रखने की सीख बनती है।

निष्ठा, अन्याय और बैर से मुक्ति

देश की रक्षा करने वाला सेनापति किसी शक्तिशाली दरबारी की ईर्ष्या और षड्यंत्र का शिकार हो जाए, तो उसकी स्मृति में वीरता के साथ अन्याय का प्रश्न भी रह जाता है। दक्षिणी सोंगकाल के सेनापति ‘युए फ़ेई’ (岳飞) और दरबारी ‘छिन हुई’ (秦桧) के नाम चीनी संस्कृति में इसी प्रसंग से जुड़े हैं। इस पुस्तक में युए फ़ेई अधोलोक के सेनापति हैं। अपने संवाद में वे माता की देश के प्रति पूरा कर्तव्य निभाने की शिक्षा याद करते हैं। उन्हें क्षति पहुँचाने वाले छिन हुई के बारे में भी वे द्वेष नहीं रखते और उसके दुःख से छूटने की कामना करते हैं। इस उत्तर में पुराना अन्याय स्वीकार करते हुए वर्तमान मन की दिशा सामने आती है। माता के प्रति कृतज्ञता और जनता के प्रति जिम्मेदारी उनकी निष्ठा का आधार हैं; दूसरे की पीड़ा देखकर उसके लिए शुभ चाहना उनकी करुणा है। इसलिए उनका परिचय केवल अतीत के वीर के रूप में पूरा नहीं होता। पुस्तक यह भी दिखाती है कि आगे जारी जीवन में वे किस भावना से अपना दायित्व निभा रहे हैं।

एक धुन-नाम की दो कविताएँ

एक कविता का नाम एक जैसा होने पर भी उसके लेखक और लिखे जाने का अवसर अलग हो सकते हैं। युए फ़ेई के संवाद और उसके बाद के संलग्न लेख में आया ‘मान जियांग होंग’ (满江红) ऐसा ही नाम है। चीनी त्सि कविता में यह धुन और छंद-क्रम का नाम है; कई कवि उसी क्रम में अपनी अलग रचनाएँ कर सकते हैं। संवाद में युए फ़ेई एक रचना को अपना बताते हैं। बाद में लगी दूसरी रचना के लेखक मिंगकाल के ‘वेन झंग मिंग’ (文征明) हैं; उसका विषय सोंग सम्राट और युए फ़ेई से संबंधित हस्तलेख पर पीछे मुड़कर विचार करना है। इस तरह एक कविता पात्र की अपनी वाणी से आती है और दूसरी बाद के कवि की ऐतिहासिक स्मृति से। इसी साहित्यिक समूह में ‘जिन पाई’ (金牌) राजकीय आदेश तथा तत्काल बुलावे के चिह्न का नाम है। बारह ऐसे चिह्नों का प्रसंग एक और संलग्न कविता में मिलता है। रचना का धुन-नाम, उसके लेखक और उसका अवसर साथ रखने पर इन अलग आवाज़ों को सहजता से पढ़ा जा सकता है।

आ-यू का अपना परिचय

इन प्रतिमाओं, संवादों और धार्मिक उपदेशों को एक पुस्तक में रखने वाली लेखिका अपने काम का परिचय भी देती हैं। उनका नाम ‘शांग ग्वान यू ह्वा’ (上官玉华) है और वे स्वयं को ‘आ यू’ (阿玉) कहती हैं। त्रिरत्न की शरण, पाँच शील और लंबे समय का शाकाहार उनके बताए अभ्यास हैं। वे कहती हैं कि बुद्ध की सहायता से जागृत ध्यानावस्था में उनकी चेतना अथवा प्रकट दूसरा रूप इन स्थानों पर जाता है। लौटने के बाद वे सरल भाषा में विवरण लिखती हैं, आवश्यक बात फिर पूछती हैं और उसे सुधारती हैं। पुस्तक की रचना के बारे में यह उनका अपना कथन है। आगे किसी पृष्ठ पर उन्हीं की देखी हुई घटना मिलती है, कहीं उनका प्रश्न और न्यायाधिकारी का उत्तर, और कहीं उद्धृत सूत्र के बाद उनका विवेचन। विषय एक रह सकता है, पर उसे बताने वाला बदल जाता है। लेखिका की साधना, उनकी लिखने की प्रक्रिया और अन्य ग्रंथों से लिए गए उपदेश, इस तरह साथ होते हुए भी अपनी-अपनी आवाज़ बनाए रखते हैं।

अनुभव और ग्रंथ की परंपरा

लेखिका जिस जागृत ध्यान को अपने अनुभव का आधार कहती हैं, उसके पास चीनी धार्मिक संसार में संदेश प्राप्त करने की दूसरी विधियों के नाम भी आते हैं। विधि स्पष्ट होने पर इन नामों का अंतर समझ में आता है। अनुष्ठान में लेखन द्वारा देव-संदेश ग्रहण करना ‘फ़ू जी’ (扶乩) या ‘ज्यांग बि’ (降笔) से जुड़ा है; कुछ पुराने सदाचार-ग्रंथों की परंपरा इसी तरह बताई गई है। किसी दूसरी आत्मिक सत्ता का मनुष्य के शरीर के माध्यम से प्रकट होना ‘फ़ू थी’ (附体) है। स्वप्न नींद का अनुभव है, जबकि ध्यान और ‘सान मेइ’ (三昧, समाधि) मन को एकाग्र तथा स्थिर करने का अभ्यास बताते हैं। आ-यू अपने लेखन को जागृत ध्यान से जोड़ती हैं। फ़ू जी का उल्लेख करते समय मूल पाठ ‘तियान दाओ’ (天道) और ‘ई ग्वान दाओ’ (一贯道) को साथ कहता है; वहाँ चीनी लोकधार्मिक समुदाय का नाम है, जिसमें तियान दाओ एक प्रचलित संबोधन भी है। छह गतियों की चर्चा में वही तियान दाओ देव-गति बताता है। लेखन की विधि, साधना की अवस्था और धार्मिक समुदाय के नाम अपने वाक्य के विषय से पहचाने जाते हैं।

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