श्रद्धा से व्यवहार तक
पट्टिका पर लिखे पूर्वज के नाम से लेकर बोधिसत्त्व के हाथ की मणि तक, श्रद्धा के इन रूपों में किसी संबंध की पहचान छिपी है। पूर्वज को अर्पण परिवार के मिले उपकार को याद करता है; शिक्षक को प्रणाम मार्गदर्शन का आभार है; किसी वीर की स्मृति जिम्मेदारी निभाने का आदर्श सामने रखती है। बोधिसत्त्व की प्रतिमा उनके संकल्प और सहायता को समझने का अवसर देती है। इसलिए पूजा के नाम और मुद्राएँ उन कामों से जुड़ी रहती हैं जिनमें सेवा, निष्ठा और करुणा व्यक्त होती हैं। मिन गोंग संदेश पहुँचाते हैं, दाओ मिंग मंत्र तथा मणि से राहत देते हैं, और बालक परिचित रूप में सुने उपदेश से अपना संकल्प बदलता है। इन भिन्न घटनाओं में सहायता का तरीका उसके प्राप्तकर्ता और जरूरत के अनुसार खुलता है। पुस्तक के अधिकारियों का वर्णन भी संबंध और काम देखकर समझा जा सकता है: कौन समाचार पहुँचाता है, कौन लेखा रखता है, कौन निर्णय समझाता है और किस आधार पर आदेश दिया जाता है। यही प्रश्न उसके विस्तृत कार्यालयों तथा दस्तावेज़ों की चर्चा को उपयोगी बनाते हैं।
संदर्भ सारणियाँ
अर्पण-स्थल और सम्मान पाने वाले
| पद | अर्थ | संबंध |
| --- | --- | --- |
| पूर्वज का स्मृति-पट्ट | पूर्वज का नाम और पीढ़ी अंकित पट्ट | वंश-स्मृति और कृतज्ञता |
| देव-पट्ट | देवता का सम्मानित नाम अंकित पट्ट | उपासना पाने वाले की पहचान |
| वेदी अथवा देव-स्थान | प्रतिमा, पट्ट और अर्पण रखने का स्थान | पूजा की व्यवस्था |
| धूप और आराधना | धूप चढ़ाना तथा निरंतर उपासना | प्राप्तकर्ता और भाव से अर्थ |