玉历宝钞 — यू-ली बाओ-छाओ
Yu li bao chao
यु-ली बाओ-छाओ चीनी परंपरा का एक पूर्ववर्ती सदाचार-ग्रंथ है, जिसे प्रस्तावना और पहले खंड के तीसवें अध्याय में स्थान मिलता है। वहाँ पान-ग्वान तान-छी से वू-मी तक उसके लेख और प्रसार की कथा बताते हैं। उसी संवाद में पुराने और नए दंडस्थलों तथा उनकी व्यवस्था के परिवर्तन आते हैं। यिन ल्यू वू छिंग से उसका संबंध दो ग्रंथों के पारस्परिक समर्थन और अलग समय के विवरणों का है। अंत का अनुभवलेख भी उसके सेवकों के चित्रों से अपने स्वप्न का वर्णन समझाता है।
地藏菩萨本愿经 — दी-ज़ांग पू-सा बन-युआन जिंग
Di zang pu sa ben yuan jing
दी-ज़ांग पू-सा बन-युआन जिंग क्षितिगर्भ बोधिसत्त्व के मूल प्रणिधानों से संबद्ध सूत्र का पूरा चीनी नाम है। आरंभिक आत्मकथन में लेखिका इससे दिव्य शक्ति अथवा अपने कर्म के कारण परलोक में प्रवेश होने की पंक्ति लेती हैं। आगे संक्षिप्त नाम दी-ज़ांग जिंग पाठ और पुण्य-समर्पण के प्रसंगों में आता है। पूरा नाम और संक्षिप्त नाम एक ही ग्रंथ-संबंध की पहचान देते हैं। बाद के उद्धार, पाठ की संख्या और समय के विशेष विवरण यिन ल्यू वू छिंग के संबंधित संवादों में अपना स्थान रखते हैं।
楞严经 — लंग-यान जिंग
Leng yan jing
लंग-यान जिंग शूरंगम सूत्र का प्रचलित छोटा चीनी नाम है। पुस्तक में इसका एक उपयोग आहार और प्राणियों से प्राप्त वस्तुओं के त्याग की व्याख्या है; दूसरा सही धार्मिक शिक्षा पहचानने की चर्चा है। दूध, अंडे, मधु और प्रसाधन के विशेष उदाहरण क्षितिगर्भ के उपदेश के लेखिका द्वारा दिए गए विवरण में आते हैं। पूरे नाम और शोउ-लंग-यान जिंग से इसकी पारस्परिक पहचान है। इस परिचय में छह इन्द्रियों के फल और कर्मानुसार अनुभव की चर्चा उसी चीनी बौद्ध पृष्ठभूमि को आगे स्पष्ट करती है।