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《阴律无情》文化导读 · HI

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D⁠i z⁠a⁠n⁠g j⁠i⁠n⁠g

दी-ज़ांग जिंग 《地藏菩萨本愿经》, अर्थात क्षितिगर्भ बोधिसत्त्व के मूल प्रणिधानों के सूत्र, का संक्षिप्त नाम है। पुस्तक में माता-पिता का स्वयं पढ़ना और संतान का मृत पिता के लिए पढ़कर पुण्य समर्पित करना अलग प्रसंगों में आता है। एक ‘पू’ (部) पूरे ग्रंथ का एक पाठ है। जन्म पूरा होने से पहले देह छूट जाने पर जारी शिशु-जीवन को पुस्तक ‘यिंग-लिंग’ (婴灵) कहती है। ऐसे शिशु की सहायता वाले प्रश्नोत्तर में पुण्य के सात हिस्सों में से छह करने वाले को और एक शिशु को मिलते हैं। उसी उत्तर में प्राणियों का दुख दूर करने के लिए भलाई करना, बदले की चाह छोड़ना और काम के बाद मन में आसक्ति न रखना बताया गया है। न्यायाधिकारी कहते हैं कि इस तरह अर्जित विशाल पुण्य शिशु को समर्पित करने पर उसे गर्भपात के उनचास दिनों के भीतर अवश्य शुभ गति मिलती है। इसी शिशु-सहायता के प्रश्न में कम से कम उनचास पूर्ण पाठ बताए गए हैं। दुर्लभ उदाहरण में एक माँ ने ठीक उनचास बार पूरा सूत्र पढ़ा और लगातार बड़े संकल्प लेकर शुभ कर्म किए; गर्भपात के पहले दिन से गिनने पर उसके शिशु को उनचासवें दिन उन्नति मिली। पुस्तक इसे अत्यंत विरल और सबसे शीघ्र हुआ उदाहरण कहती है। इस तरह पुण्य का हिस्सा, पूरे पाठ की संख्या और दिन अपने अलग अर्थ रखते हैं; आगे प्रत्येक शिशु की स्थिति के अनुसार आवश्यक पुण्य और समय का अंतर भी समझाया गया है।

华严经 — ह्वा-यान जिंग

H⁠u⁠a y⁠a⁠n j⁠i⁠n⁠g

ह्वा-यान जिंग, अर्थात् अवतंसक से संबद्ध चीनी सूत्रनाम, पुस्तक में तीन विषयों को सहारा देता है। पहले निरंतर प्रयत्न के दस रूपों से लेखिका को काम में दृढ़ता मिलती है। फिर निर्मल करुणा का उद्धरण क्षितिगर्भ की सहायता से जुड़ता है। एक और स्थान पर मन की सृजनकारी भूमिका से कर्म-दर्पण में दिखाई देने वाली छवियाँ समझाई जाती हैं। सूत्र की सीख इन संवादों को अर्थ देती है; दर्पण और आधुनिक दंडस्थलों के विशिष्ट दृश्य यिन ल्यू वू छिंग के अपने वर्णन में विकसित होते हैं।

大宝积经*菩萨藏会 — दा बाओ-जी जिंग · पू-सा ज़ांग हुई

D⁠a b⁠a⁠o j⁠i j⁠i⁠n⁠g · P⁠u s⁠a z⁠a⁠n⁠g h⁠u⁠i

दा बाओ-जी जिंग · पू-सा ज़ांग हुई में पूरे सूत्र-संग्रह का नाम और उसके भीतर बोधिसत्त्व संबंधी उपदेश-समूह का नाम साथ आता है। हुई इसी समूह की पहचान है। उद्धरण में साहस, श्रद्धापूर्ण समझ, दृढ़ सहनशीलता और सही प्रयास की चर्चा है। लेखिका नरक की लगातार यात्राओं से हुई थकान पर विचार करते हुए इससे फिर शील सँभालने और परोपकारी काम जारी रखने की प्रेरणा लेती हैं। दा बाओ-जी जिंग पूरे संग्रह को और पू-सा ज़ांग हुई उसके इस विशेष भाग को पहचानता है।

佛说法灭尽经 — फ़ो श्वो फ़ा-म्ये-जिन जिंग

F⁠o s⁠h⁠u⁠o f⁠a m⁠i⁠e j⁠i⁠n j⁠i⁠n⁠g

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