| ऋण माँगना | किसी अधूरे संबंध की पूर्ति दूसरे से चाहना। |
| ऋण चुकाना | पहले से बचा दायित्व या संबंध पूरा करना। |
| युआन-छिन झाई-झू — 冤亲债主 | उपकार, चोट और अधूरे कर्म-संबंध से जुड़े जीव; ऋण में धन के साथ सेवा और दायित्व भी आते हैं। |
| सु ये / ये झांग | पूर्वकृत कर्मों का आज से संबंध / उनसे साधना में आने वाला अवरोध। |
| व्यक्तिगत / सामूहिक कर्म | अपने कर्म और फल / कई जीवनों की साझा स्थिति। |
| गर्भप्रवेश का संबंध / निर्दिष्ट पुण्य-समर्पण | माता-पिता और संतान के कर्मगत संबंधों का मिलना / जीवित व्यक्ति का सत्कर्म करके किसी विशेष दिवंगत का हित चाहना। |
कुछ परिचित हिंदी पद और इस अध्याय का विषय
| पद | उसका संदर्भ | इस अध्याय से संबंध |
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| ऋणानुबंध | धार्मिक व्याख्या में संबंध और बचे हुए दायित्व की भाषा। | पुस्तक की चार दिशाएँ हैं: उपकार, बैर, ऋण माँगना और चुकाना। |