| स्थान और शरीर के अंग का अंतर | फ़ेइ-दी बताता है कि आचरण कहाँ होता है; फ़ेइ-ची बताता है कि शरीर के किस अंग का उपयोग होता है। एक ही आचरण में स्थान और अंग, दोनों की शर्तें साथ आ सकती हैं। | दोनों वर्गों का आकलन उनकी अपनी शर्तों से होता है। |
विशेष छूट और पास के अलग प्रसंग
| परिस्थिति | संबंधित पूरी शर्तें | मूल कथन का परिणाम |
| --- | --- | --- |
| विधिवत् विवाहित साथी द्वारा विवशता | स्वयं आनंद की इच्छा पूर्णतः न होना; समय पर पश्चात्ताप और सुधार; आगे दूसरों को समझाने का संकल्प | संबंधित नरक-दुःख से छूट |
| पत्नी का इनकार और समझाना | अनुचित अंग-वाले कर्म से इनकार; समय/स्थान-वाले अन्य कर्म में कम इच्छा के साथ भागीदारी | पुण्य-भाग्य का क्षय; इनकार और समझाने से कुछ पुनर्प्राप्ति |
| उसी प्रसंग में पति का सुधार | पहले एक पत्नी और दो नियमित प्रेमिकाएँ; बाद में पश्चात्ताप, माता-पिता की सेवा, सार्वजनिक कर्तव्य में निष्ठा और कानून का पालन | तप्त स्तंभ के पाँच सौ वर्ष से छूट; ताम्रगोलक के पाँच सौ वर्ष शेष |
| जीवन में एक ही साथी, बाद में उसी से विवाह | साथी की कामना कम; निषिद्ध समय, स्थान या अंग वाले व्यवहार का अभाव | केवल सौभाग्य का क्षय; शीघ्र पश्चात्ताप करके अशुभ कर्म का भार घटाया जा सकता है। |
| विवाह से पहले और बाद में एक ही साथी, प्रबल इच्छा | समय, स्थान, अंग की उक्त स्थितियाँ भी; जीवन में पश्चात्ताप और दूसरों को समझाना | विवाह से पहले और बाद में पुण्य और आयु का क्षय; दोनों नरकदंड पाँच-पाँच सौ वर्ष; बाद की शर्तों से संबंधित नरक-फल से छूट की संभावना |
| अनेक साथी, गंभीर आसक्ति | व्यक्तिगत कर्म के अनुसार निर्णय | संबंधित प्रत्येक दंड कम से कम दस हज़ार वर्ष तथा आगे पशु-जन्म आदि |