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《阴律无情》

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60. सांस्कृतिक टिप्पणी: क्षितिगर्भ दशचक्र सूत्र में ‘चक्र’ का रूपक बाधाओं को दूर करने वाली शिक्षाओं और साधना के लिए आता है। उसी ग्रंथ में बोधिसत्त्व के दस चक्रों को दस कुशल कर्मपथ कहा गया है। यहाँ यह पद बोधिसत्त्व की स्तुति का अंश है।↩︎

61. सांस्कृतिक टिप्पणी: बौद्ध परंपरा में मंजुश्री के लिए ‘माता’ का प्रयोग उस प्रज्ञा के अर्थ में मिलता है जिससे बोध उत्पन्न होता है; यह शारीरिक वंश-संबंध नहीं है। 《佛說放鉢經》 में भी बुद्धमार्ग में मंजुश्री की शिक्षा की तुलना माता-पिता की भूमिका से की गई है।↩︎

62. अनुवादक की टिप्पणी: ‘गर्भरूपी कारागार’ गर्भ में रहने के दुःख का बौद्ध रूपक है; आत्मा की अवस्थाओं का यह वर्णन पुस्तक की धार्मिक दृष्टि का हिस्सा है। देखें DILA, 胎獄। ‘दस महीने’ पारंपरिक अभिव्यक्ति है। चिकित्सा में गर्भावधि सामान्यतः अंतिम मासिक धर्म के पहले दिन से लगभग चालीस सप्ताह गिनी जाती है; देखें अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रीशियन्स ऐंड गायनेकोलॉजिस्ट्स।↩︎

63. स्रोत-टिप्पणी: ‘सर्वव्यापी द्वार अध्याय’ सद्धर्मपुण्डरीक सूत्र का पच्चीसवाँ अध्याय है और अवलोकितेश्वर से संबंधित है। यहाँ दिए गए दोनों उद्धरण उसके दो अलग स्थानों से हैं। देखें चीनी पाठ, खंड 7।↩︎

64. सांस्कृतिक टिप्पणी: यहाँ पंचांग प्रणाम पाँच अंगों को धरती से लगाकर किया जाने वाला बौद्ध प्रणाम है, जो गहरे सम्मान को व्यक्त करता है। देखें DILA, 五體投地।↩︎

65. सांस्कृतिक टिप्पणी: कैथोलिक धर्मशिक्षा, अनुच्छेद 495 में मरियम को यीशु की माता माना गया है। उन्हें अवलोकितेश्वर का एक प्रकट रूप बताने वाली बात इस पुस्तक में परलोक के न्यायाधिकारी की व्याख्या है; इसे यहाँ कैथोलिक धर्मशिक्षा का कथन नहीं माना गया है।↩︎

66. पारिभाषिक टिप्पणी: प्रत्येकबुद्ध वह है जो किसी गुरु से शिक्षा पाए बिना स्वयं बोध प्राप्त करता है। देखें DILA बौद्ध शब्दकोश, 辟支佛।↩︎

67. अनुवादक की टिप्पणी: यहाँ ‘वृक्क-शक्ति का क्षीण होना’ पारंपरिक चीनी चिकित्सा की अवधारणा है; देखें हांगकांग बैपटिस्ट विश्वविद्यालय का विवरण। यह अंश किशोर द्वारा अपने लक्षणों की दी गई व्याख्या है; केवल इस वर्णन से बताए गए कारण-कार्य संबंध की पुष्टि नहीं होती। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार हस्तमैथुन सामान्य यौन विकास का हिस्सा हो सकता है और अपने-आप में बीमारी का प्रमाण नहीं है।↩︎

68. अनुवादक की टिप्पणी: 《ई जिंग》 (परिवर्तन का ग्रंथ) और 《शू जिंग》 (प्राचीन दस्तावेज़ों का ग्रंथ) प्राचीन चीनी ग्रंथ हैं। यहाँ इनके कथन यिनगुआंग के उद्धरण के भीतर आए हैं। देखें ई जिंग का संबंधित अंश और शू जिंग का संबंधित अंश।↩︎

69. अनुवादक की टिप्पणी: बौद्ध शब्दावली में तीन दुर्गतियाँ नरक, प्रेतयोनि और तिर्यक् (पशु) योनि हैं। कल्प अत्यंत लंबी समयावधि है; यहाँ इसे वर्षों की निश्चित संख्या में नहीं बदला गया है। देखें DILA में तीन दुर्गतियाँ और मोनियर-विलियम्स शब्दकोश, kalpa।↩︎

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