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《阴律无情》

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आम तौर पर हम गलत व्यक्ति को नहीं पकड़ते, क्योंकि 《परलोक का आत्मिक सत्ता संबंधी आधिकारिक पत्र》 में जीवित व्यक्ति की मृत्यु की प्रक्रिया पहले ही दिखाई देने लगती है। परलोक-पत्र मिलने पर हम उसे पहले एक बार देख लेते हैं। आयु पूरी होने से पहले हर मनुष्य के शरीर से एक प्रकार का प्रकाश निकलता रहता है, बस हर व्यक्ति के शरीर के प्रकाश की चमक अलग होती है। शरीर का प्रकाश जितना अधिक उज्ज्वल होता है, उतना ही यह दर्शाता है कि वह बहुत सदाचारी व्यक्ति है, यहाँ तक कि शुद्ध आचरण वाला साधक भी है। यदि मनुष्य के शरीर का प्रकाश पूरी तरह लुप्त हो जाए और वह नरक के काले प्रकाश से घिर जाए, तो वह ऐसी आत्मिक सत्ता है जिसे हमें, यानी बैलमुख और अश्वमुख को, पकड़कर परलोक लाना होता है। इन दोनों लक्षणों के प्रकट होने पर आम तौर पर गलती नहीं होती। यदि कभी सचमुच गलत आत्मिक सत्ता पकड़ ली जाए, तो हम उसे तुरंत मानव संसार में वापस भेज देते हैं और परलोक के अधिपति यमराज भी घटना के कारणों की विस्तृत जाँच करके उसका निपटारा करते हैं।

परलोक के अधिपति यमराज शीलों का उल्लंघन करने वाले प्राणियों को वास्तव में कठोर दंड देते हैं। लेकिन यदि हमने जानबूझकर गलती नहीं की हो, तो वे हमें अपनी भूल सुधारकर नया आरंभ करने का अवसर देते हैं। हर बात के पीछे अनेक कारण और परिणाम मिलकर काम करते हैं। स्वाभाविक है कि हम मामलों को बहुत सावधानी से सँभालते हैं। वरना यदि हम बार-बार गलत आत्मिक सत्ताओं को पकड़ लें, तो क्या हमारी व्यक्तिगत लापरवाही मानव संसार के परिवारों में त्रासदियाँ पैदा नहीं करेगी? परलोक के अधिपति यमराज हमें दंड न भी दें, तब भी हमें स्वयं कर्मफल का एक भारी ऋण उठाना पड़ेगा। आम तौर पर हम आत्मिक सत्ता की आयु पूरी होने से पहले ही घटनास्थल पर पहुँचकर वहाँ का वातावरण देखते हैं और उसकी पहचान संबंधी विवरण का मिलान करते हैं, ताकि गलत व्यक्ति न पकड़ा जाए।

आजकल हम प्रतिदिन जिन आयु पूरी कर चुकी आत्मिक सत्ताओं को पकड़ते हैं, उनमें लगभग सभी ऐसे मनुष्य होते हैं जिन्होंने यौन दुराचार संबंधी शील का उल्लंघन किया है। जिन आत्मिक सत्ताओं को हम पकड़कर परलोक लाते हैं, उन्होंने निश्चित रूप से जीवित रहते नरक में ले जाने वाले अनेक दुष्कर्म किए होते हैं। अब मानव संसार के अनगिनत लोगों में से अधिकांश ने यौन दुराचार का अपराध किया है। उनकी आत्मिक सत्ताओं का चुंबकीय क्षेत्र यौन दुराचार के भाव से बहुत घना होता है। उन्हें देखकर भला हम कैसे मुस्कुरा सकते हैं?

यौन दुराचार के ऐसे दुष्कर्म करने वाली कुछ अपराधी आत्माएँ आयु पूरी हो जाने के बाद भी यौन दुराचार के विचार फैलाती रहती हैं। यह आदत के स्वभाव बन जाने का परिणाम है। हमें कठोर और उग्र व्यवहार से ही इन अपराधी आत्माओं की चेतना वापस खींचकर उन्हें समझाना पड़ता है कि मानव संसार में उनके पुण्यफल समाप्त हो चुके हैं और अब उन्हें सच्चे मन से पश्चात्ताप करके नरक का दंड भोगना होगा।

वास्तव में हम भी मुस्कुराना चाहते हैं, लेकिन सचमुच मुस्कुरा नहीं पाते। जब तक 《परलोक के अटल विधान》 मानव संसार में बड़े पैमाने पर प्रसारित न हो, उसे पढ़कर हर व्यक्ति मानवीय संबंधों की मर्यादा न निभाए, नरक में ले जाने वाले दुष्कर्म करना न छोड़े और सारे नरक खाली न हो जाएँ, तब तक ऐसा नहीं हो सकता। उस समय हम भी अवश्य मुस्कुराएँगे।

अब बहुत अधिक मनुष्य नरक में गिर रहे हैं और हमारा काम बढ़ता ही जा रहा है। आ यू, आपको सचमुच जल्दी से 《परलोक के अटल विधान》 लिखकर पूरा करना चाहिए। आशा है कि यह सत्प्रेरक पुस्तक लोगों के मन को अच्छाई की ओर मोड़ेगी और मानव संसार में भविष्य में आने वाली तरह-तरह की विपत्तियों की दिशा बदल देगी।

अमिताभ बुद्ध! हमारे पास काम है, अवसर मिलने पर फिर बात करेंगे! आप आगे का भ्रमण जारी रखें, हम पहले चलते हैं। फिर मिलेंगे!”

अमिताभ बुद्ध! बैलमुख और अश्वमुख सचमुच कितनी तेज़ी से चलते हैं! अब तो वे दिखाई भी नहीं दे रहे। परलोक का हर कर्मचारी देखने में भले ही बहुत उग्र लगता हो, लेकिन सभी न्याय की भावना से भरे हैं और बहुत ज़िम्मेदार भी हैं। मुझे भी लौटकर अपना लेखन शीघ्र पूरा करने में जुटना चाहिए।

नमो अमिताभ बुद्ध! श्वेत कमल पर सवार होकर लौटती हूँ!

6/सदाचार और दुराचार प्राचीन काल से बर्फ़ और अंगारे जैसे रहे हैं; निंदा और प्रशंसा में आज सत्य और असत्य का निर्णय हो! — एक युग के राष्ट्रनायक सेनापति यूए फ़ेई से भेंट और बीते दिनों की घटनाओं का विस्तृत वृत्तांत

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