शीलों का पालन मनुष्य होने का आधार है। कोई भी व्यक्ति यदि पाँच शीलों का पालन करे, तो वह अनेक पुण्यगुणों से संपन्न होगा।71 जो भी शील भंग करता है, वह सौभाग्य और आयु घटाने वाले परलोक के अटल विधान से बच नहीं सकता। यदि वह शीलों का पालन करने वाला बौद्ध अनुयायी है, तो उसके दोषों में शील-भंग का एक और दोष जुड़ जाएगा। भविष्य में उसे स्वयं ही सारे दुःखद फल भोगने होंगे।
मेरा एक और गहरा अनुभव बुद्ध की महान करुणा की शक्ति का है। यह अनुपम महान करुणा-शक्ति हम दुःखी प्राणियों को दुःख से निकालकर सुख तक ले जा सकती है। हमें केवल हृदय में कृतज्ञता रखकर सच्चे मन से बुद्ध-नाम का स्मरण और पश्चात्ताप करना है; इतना ही अंधकारमय नरक की पीड़ा देने वाले पापकर्मों को मिटाने के लिए पर्याप्त है।
हम सभी सामान्य मनुष्य हैं और सामान्य मनुष्य होने के कारण अतीत में हमसे अनेक गलत विचार और आचरण हुए ही हैं। जब हमें अपने गलत और अनुचित आचरण का पता चले, तो तुरंत उसे सुधार लेना चाहिए और फिर कभी नहीं दोहराना चाहिए। अपने शेष जीवन में मृत्यु तक शीलों का भली-भाँति पालन करें, भलाई और पुण्य संचित करें, बुद्ध-नाम का स्मरण करें और जीवों को मुक्त करें। यदि दुर्भाग्यवश शुद्धभूमि में पुनर्जन्म न भी मिल सके, तब भी परलोक के शासक यमराज अवश्य ही हमारे साथ नरमी बरतेंगे और हमारे पापकर्म क्षमा करेंगे।
ये मुझ लज्जित, विनीत साधिका आ यू के थोड़े-से अनुभव हैं, जिन्हें लिखकर मैं सभी श्रद्धालुओं के साथ साझा कर रही हूँ!
यहाँ मैं सच्चे मन से कामना करती हूँ कि हमारे दक्षिण जम्बूद्वीप के सभी चेतन प्राणी72 पवित्र जीवन जी सकें, जीवन भर यौन दुराचार न करें, पति-पत्नी पवित्रता से साथ साधना करें और सभी शुभ परिस्थितियों से संपन्न हों!
मैं यह भी कामना करती हूँ कि समस्त आकाश और धर्मधातु के सभी चेतन प्राणी पवित्र शीलों का पालन करके सिद्धि प्राप्त करें, महान बोधिचित्त उत्पन्न करें, कोई बुराई न करें, सभी भले कर्म अपनाएँ, लगन से बुद्ध-नाम का स्मरण और साधना करें, शरीर और मन को पवित्र बनाएँ तथा कमल से जन्म लें!73
लज्जित विनीत साधिका शांगगुआन युहुआ की ओर से सादर
1/जीवन-मृत्यु की बही
आ यू ने जो देखा, उसके अनुसार जीवन-मृत्यु की बही का रंग हल्का पीला है। उसके आवरण पर कुछ रेखाओं वाले अलंकरण हैं और उस पर 「生死簿」, अर्थात् “जीवन-मृत्यु की बही”, ये तीन चीनी अक्षर लिखे हैं। उसकी बनावट और जिल्द पुराने समय की धागे से सिली हुई पुस्तकों जैसी है।
हल्के पीले रंग वाली बही में आत्मिक शरीर के जीवित रहते हुए जीवन की सभी शुभ-अशुभ घटनाएँ, विपत्तियाँ और सौभाग्य दर्ज हैं। परलोक के न्यायाधिकारी के हाथ में गहरे लाल रंग की जीवन-मृत्यु की एक और बही भी है, जिसमें परलोक के आत्मिक शरीरों का विस्तृत विवरण दर्ज है। उसकी बनावट और जिल्द हल्के पीले रंग वाली बही जैसी ही है; केवल रंग अलग है।