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《阴律无情》文化导读 · HI

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| पितृ दोष | गोकर्ण मोक्ष के अनुष्ठान-विवरण में पितृ दोष पूर्वजों के प्रति अधूरे अनुष्ठानिक दायित्व से जुड़ी ऋण अथवा बाधा की स्थिति है। | यह पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति दायित्व का प्रश्न सामने लाता है। पुस्तक पूर्वज-स्मृति, शिशु-आत्माओं के दो नगर, बाहर जाने की पीली पत्रिका और निर्दिष्ट पुण्य-समर्पण को अलग कार्यों में समझाती है। |

| ग्रह दोष | हिन्दवी कोश में ग्रह दोष ज्योतिष का पद है: किसी ग्रह की अशुभ या अरिष्टकारक दृष्टि अथवा प्रभाव। | यह पद ग्रहों के प्रभाव पर केंद्रित है। इस अध्याय में साझा कर्म, व्यक्तिगत कर्म और पुण्य-समर्पण क्रमशः साथ की दशा, अपने आचरण और दूसरे के लिए सत्कर्म को समझाते हैं। |

| श्राद्ध / दान | दिवंगत का स्मरण और उदारतापूर्वक देना। | स्मरण, अर्पण और सहायता के कर्म परिचय दे सकते हैं; छिंगमिंग, नाम-पट्टिका और पुण्य-समर्पण का अपना चीनी उपयोग है। |

जन्म पूरा न होने की परिस्थितियाँ: पुस्तक का वर्गीकरण

| घटना और स्थान | पुस्तक में कही परिस्थिति | पुस्तक में कहा आगे का फल |

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| अनचाही घटना: अध्याय 2⁠0 और 2⁠3 | गर्भ में मृत्यु, मोलर गर्भावस्था (शिशु को पोषण देने वाली अपरा के ऊतक का असामान्य विकास; चीनी: 葡萄胎) और गर्भवती स्त्री की बीमारी आदि; शिशु के अपर्याप्त पुण्य वाली इस श्रेणी के माता-पिता को अध्याय 2⁠3 में नरकदंड से छूट है। | इस उत्तर में माता-पिता अपने पिछले कर्म और पुण्य की कमी पर पश्चात्ताप करते हैं तथा पाठ और पुण्य-समर्पण से शिशु की अच्छी गति की कामना करते हैं। पश्चात्ताप का विषय यहाँ पुराना कर्म-संबंध है। |

| आर्थिक कारण से लिया निर्णय: अध्याय 2⁠0 के उत्तर का दूसरा भाग (L⁠0⁠4⁠6⁠3) | न्यायाधिकारी इसे जीव-हत्या की श्रेणी में रखते हैं; अविवाहित होने पर विवाहपूर्व संबंध के लिए भी दंड बताते हैं। आर्थिक कारण और अविवाहित होने की स्थितियाँ एक ही मामले में आ सकती हैं; मूल उत्तर दोनों को अलग बताता है, पर ऐसे मामले में किसी एक अवधि को चुनने या दोनों अवधियाँ जोड़ने का नियम नहीं देता। | उत्तर में जीवित रहते स्वास्थ्य, कामकाज और धन-संबंधी पुण्य का क्षय तथा मृत्यु के बाद तलवार-वन के 1⁠0⁠0⁠0 वर्ष कहे गए हैं। अविवाहित के लिए पहले कोड़े के नरक के 5⁠0⁠0 वर्ष हैं। फिर मानव-जन्म में शेष फल के उदाहरण के रूप में स्त्री के स्त्रीरोग और पुरुष के प्रजनन-तंत्र संबंधी रोग बताए गए हैं। |

| अविवाहित स्त्री-पुरुष का स्वैच्छिक निर्णय: अध्याय 2⁠0 के उत्तर का तीसरा भाग (L⁠0⁠4⁠6⁠4) | इस भाग में गर्भपात का अंतिम निर्णय लेने वाली स्त्री पर अधिक भार कहा गया है। पुरुष के आग्रह पर भी स्त्री बच्चे को जन्म दे तो पुरुष का अशुभ कर्म और स्त्री का गुप्त पुण्य दर्ज होता है। | इस भाग में जीवित रहते पुण्य का क्षय, फिर पहले कोड़े के नरक के 8⁠0⁠0 वर्ष और तलवार-वन के 2⁠0⁠0⁠0 वर्ष कहे गए हैं। पुरुष आगे पश्चात्ताप करे, बच्चे की अच्छी देखभाल करे और दूसरों को जीवन बचाने के लिए समझाए तो उकसाने वाला कर्म क्षमा होने की बात है। ये अवधियाँ उत्तर के इसी भाग की हैं। |

| दो नगरों के निवासी | वांग सि खू छंग में पीड़ा और बैर; पुराने श्युए वू छंग में अनचाही गर्भहानि और एकाकीपन। | पुराना श्युए वू छंग कथा के समय लगभग 7⁠0 वर्ष का है। वांग सि खू छंग के शिशुओं को पीली पत्रिका यमराज की अनुमति से मिलती है; दूत उन्हें उसी वांग सि खू छंग से माता-पिता की खोज में बाहर जाने देते हैं। |

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