मुझे लगा कि कंप्यूटर पूछ रहा था, क्या आत्मा का नाम xxx है? स्त्री आत्मा जवाब देने वाली थी। मुँह खोलते ही कीलें भीतर उड़कर गईं और उसकी जीभ बाहर खींचने लगीं। दर्द से उसने हाथ से कीलें हटाने की कोशिश की। विचित्र बात थी कि कीलें अचानक मुलायम हो गईं और उसके हाथ को चोट नहीं लगी। उसने हाथ छोड़ दिया और दाएँ-बाएँ भागने लगी। पर बाईं ओर भागे या दाईं ओर, हर कदम पर पाँचों कीलें उसकी जीभ को और लंबा खींचतीं, और खिंचा हुआ भाग कीलों के पिछले सिरों पर लगे ब्लेडों से कटकर ज़मीन पर गिर जाता। इस पीड़ा से वह पूरी शक्ति लगाकर कंप्यूटर की सीमा से निकलना चाहती थी। अंततः सिर उठाकर वह बाईं ओर भागी।
आह! दोनों ओर के खूंखार यक्ष उसे किसी हाल में छोड़ने वाले नहीं थे। बाईं ओर गरजते लोहे के हथौड़े वाले यक्ष ने क्रोध में उसके सिर पर हथौड़ा मारा और एक ही चोट से वह बेहोश हो गई। यक्ष उसे बेहोश रहने नहीं देता था। उसने लोहे की कील से उसका मुँह बेरहमी से एक बार खींचा और फिर थप्पड़ मारा; रक्त फिर बहा। स्त्री आत्मा चक्कराती हुई होश में आई, उठी और दाईं ओर भागी। वहाँ धुँधले हरे रंग का बर्फ़ीला यक्ष भी था। उसने तुरंत ठंडी गैस और मारने वाले बर्फ़ के टुकड़े छोड़े। स्त्री आत्मा के पैर उसी क्षण उसके नियंत्रण से बाहर हो गए और वह डरकर पीछे हटती हुई कंप्यूटर के पास फिर दंड भोगने लौट आई। यह देखकर सिर चकरा गया—कहीं भाग न सकने का दुख!
मैंने यक्ष की ओर देखकर पूछा, “लोहे के हथौड़े वाले यक्ष, क्या आप कुछ दया कर सकते हैं? इस स्त्री आत्मा की पिछली चोटें भी नहीं भरीं कि आपने फिर मार दिया। वह इतनी दयनीय है कि थोड़ी देर विश्राम का भी अवसर नहीं मिलता।”
लोहे के हथौड़े वाले यक्ष ने कहा, “इस अपराधी आत्मा को जीवित रहते फूट डालना विशेष रूप से पसंद था। जो भी घटना उसे पता चलती, वह उसे रंग देकर और बढ़ा-चढ़ाकर ऐसा बना देती जिससे दोनों पक्षों को नुकसान हो। उसके आपसी संबंध अत्यंत खराब थे। जहाँ भी जाती, लोगों से बैर बाँधती और अप्रिय बनती। सबसे गंभीर बात यह थी कि उसने अपनी सास को हानि पहुँचाई।
उसका पति, श्री ए, उससे विवाह से पहले अपनी माँ के प्रति बहुत कर्तव्यनिष्ठ था। श्री ए के तीन वर्ष का हो जाने के बाद उसकी माँ विधवा हो गई थी और उसने अकेले उसे पाला। माँ-बेटा सदा एक-दूसरे के सहारे रहते थे और उनका जीवन अच्छा था। विवाह करके घर आने के बाद अपराधी आत्मा अपनी सास से ईर्ष्या करने लगी। वह लगातार फूट डालती रही और दुर्भावना से माँ-बेटे के संबंध बिगाड़ती रही। उसने जानबूझकर सास पर किसी पुरुष से अवैध संबंध का आरोप भी लगाया। काम में व्यस्त रहने के कारण श्री ए ने पत्नी की निजी बातों पर विश्वास कर लिया। इससे माँ-बेटे का संबंध टूट गया और अंततः बेटे से प्रेम करने वाली बूढ़ी माँ दुख में घुलकर मर गई।
सास की आत्मा ने परलोक पहुँचकर इस अपराधी आत्मा के विरुद्ध फूट डालने और झूठा कलंक लगाने की शिकायत की। चूँकि इस स्त्री ने मनुष्यलोक में फूट डालने वाली वाणी का अपराध किया था, इसलिए अब उसे इस दाएँ-बाएँ दौड़ने वाले नरक में आकर यातना और हमारी मार सहनी पड़ रही है। नरक में दंड भोगने का यह उसका पहला पड़ाव है। यहाँ की अवधि पूरी होने पर उसे दूसरे नरकों में भी दंड भोगना होगा।”
तभी अत्यंत धुँधले हरे रंग का दिखता एक खूंखार यक्ष हमारी दिशा में देखने लगा।
न्यायाधिकारी बोले, “लोहे के हथौड़े वाले यक्ष, आप पहले अपना काम कीजिए। आत्मा खींचने वाले प्रेतराज के पास तत्काल निपटाए जाने वाले काम हैं।”
लोहे के हथौड़े वाले यक्ष ने न्यायाधिकारी को प्रणाम करके कहा, “न्यायाधिकारी, कृपया आप दर्शन जारी रखें। मैं पहले विदा लेता हूँ।”
न्यायाधिकारी बोले, “आ यू! आज हमें मनुष्यलोक की कई विपत्तियों और दुर्घटनाओं से संबंधित मामले शीघ्र निपटाने हैं, इसलिए सब बहुत व्यस्त हैं। किसी और दिन फिर दर्शन करने आइए!”