जिसका पहले से पुत्र हो और फिर भी उपपत्नी रखे, उसकी आयु प्रति स्त्री दो वर्ष घटती है। पद-प्रतिष्ठा वाले की पद-प्रतिष्ठा के आठ भाग घटेंगे, आयु नहीं।139140
विधवा का पुनर्विवाह का इरादा न हो और कोई छल से उसे लुभाए, तो आयु तीन वर्ष घटती है। पुनर्विवाह की इच्छा हो तो आयु-ह्रास नहीं।
विधवा से विवाह करते समय उसका एक पुत्र या पुत्री पिछले पति के घर छोड़ दिया जाए, तो आयु दो वर्ष घटती है। यदि इस कारण उस संतान की मृत्यु हो जाए तो आयु एक जी घटती है।
मित्रों की भेंट में अश्लील बातें तीन बार करने पर आयु एक महीना घटती है। उनसे कोई यौन दुराचार करे तो आयु तीन वर्ष घटती है। पद-प्रतिष्ठा वाले को उसके रुकने या देर से मिलने का दंड है।141
रास्ते में सुंदर व्यक्ति को देखकर आने और जाने तक घूरना तीन बार हो, तो आयु आधा महीना घटती है। सेवा-भाव का ढोंग करके भीतर दुर्भावना रखे तो एक बार में आयु एक सुआन घटती है। मूल टिप्पणी: एक सुआन तीन महीने है।
अश्लील नाटक सुनना पसंद करने पर हर बार आयु तीन महीने घटती है। पद-प्रतिष्ठा वाले का पद रुकता या विलंबित होता है। अश्लील नाटक प्रस्तुत करने की माँग करे तो हर बार आयु एक सुआन घटती है। किसी को हानि हो तो एक जन्म पशु होता है।142
अश्लील पुस्तकें देखना पसंद करने पर तीन बार में आयु आधा महीना घटती है। उससे रोग उत्पन्न हो तो आयु तीन वर्ष घटती है।
दूसरे को यौन दुराचार के लिए उकसाने वाले पर उसके अपराध से दो स्तर कम दंड है। पिता या बड़े भाई द्वारा पुत्रों और छोटे भाइयों को, तथा स्वामी द्वारा नौकरों को ऐसा करने की छूट देने पर भी यही नियम है।
न्यायाधिकारी लू कहते हैं: इन परलोक-दंडों के अनुसार किसी भी यौन अपराध में थोड़ी भी छूट कठिन है, पर निकट पारिवारिक यौन दुराचार सबसे भारी है। संबंध या दर्जे में कनिष्ठ द्वारा वरिष्ठ पर अत्याचार हो, या उम्र में बड़ा व्यक्ति छोटे को दबाए, मृत्यु के बाद सभी अवीचि नरक में जाते हैं। आज सामाजिक रीति अत्यंत बिगड़ गई है। ऐसे अपराध अक्सर अधिकारी-परिवारों और पढ़े-लिखे लोगों में होते हैं। लंबे समय तक एक-दूसरे से प्रभावित होकर इसे सामान्य आदत मान लेते हैं, भ्रम में लज्जा नहीं जानते और नहीं जानते कि अंत क्या होगा। विवश होकर देव-अमरों ने जेड सम्राट को निवेदन किया कि परलोक के दंड मनुष्यलोक में खुले रूप से बताए जाएँ, छिपाए न जाएँ। यह देखकर पश्चात्ताप और सुधार करने वालों का अपराध घटेगा। निष्ठा और माता-पिता के प्रति कर्तव्य निभाने वालों का अपराध घटेगा। पुण्य-सद्गुण संचित करने वालों का अपराध घटेगा। लेख देखकर भी न सुधरे और उलटे निंदा करे, तो अशुभ फल या बिजली गिरने का प्रकोप निश्चित है। जो विश्वासपूर्वक पालन करके व्यापक प्रचार करे: सौ लोगों तक पहुँचाए तो आयु एक जी बढ़े; दो सौ तक तो पुत्रहीन को पुत्र मिले; तीन सौ तक तो आयु दो जी बढ़े; चार सौ तक तो वंश समृद्ध हो; पाँच सौ तक तो पद-प्रतिष्ठा निरंतर रहे; एक हज़ार तक तो नाम लाल दैवी अभिलेख में चढ़े; पूरे संसार में फैलाए तो मृत्यु के बाद अमर बने। दस धनाढ्यों को बताना दो सौ लोगों को बताने के बराबर; एक अधिकारी को बताना सौ लोगों के बराबर है। ये सभी बातें फ़ुयोउ सम्राट द्वारा जेड सम्राट के सामने निवेदित होकर स्वीकृत और लागू हुई हैं।143
सादर टिप्पणी: नरक में ‘कल्प भुगतना’ यहाँ प्रत्येक कल्प में एक नरक का दंड एक बार भोगना है। परलोक की यातना मनुष्यलोक जैसी नहीं। एक बार दंड दिए जाने पर उसका शरीर मर चुका होता है; फिर उसे अनिवार्य रूप से मानवीय रूप में लौटाकर पहले की तरह दंड दिया जाता है और मारा जाता है। निर्धारित कल्प पूरे होने पर यह अपराध समाप्त होता है। दूसरे अपराध हों तो उनके अनुसार और नरक-दंड मिलता है। ‘दोंगमिंग जी’ में यौन पापों के अपराधियों का विस्तृत वर्णन देखा गया है: जीवित रहते सुधारकर भलाई अपनाएँ तो मृत्यु के बाद अपराध अपने-आप घटते या मिटते हैं; मृत्यु तक न सुधरें तो एक सभागृह से अन्य सभागृहों में भेजे जाते हैं और हृदय-दंड नरक, ताँबे के मानव का नरक, वृक्क-काटने का नरक, चूहों का कुतरना, तेल-कड़ाही, रथ से चीरने जैसे बड़े-छोटे नरकों के दंड क्रमशः भोगते हैं। निकट पारिवारिक दुराचार हो तो उसके विशेष नरकों में भी जाते हैं, या सदा नरक में बंद रहकर दंड भोगते हैं। यौन पापों में पारिवारिक दुराचार विशेष रूप से भारी है। ऊपर के प्रत्येक नरक में निश्चित कल्प पूरे होने के बाद ही अगले जन्म-कल्प में जा सकते हैं। यहाँ जन्म-कल्प का अर्थ एक बार जन्म लेना है। ‘जिनके जियाओ’ और ‘लुनके जियाओ’ में भी भलाई के पुरस्कार और बुराई के दंड के नियम विस्तार से हैं। इन परलोक-विधानों में दंड में कमी, दंड-मुक्ति, स्तर-वृद्धि और प्रतिपूर्ति के अलग-अलग प्रावधान दिखाते हैं कि शुभ-अशुभ का भेद रत्तीभर भी नहीं चूकता। इन दोनों संहिताओं और ‘दोंगमिंग जी’ को साथ देखें तो कर्मफल का विश्वास और प्रमाण अधिक स्पष्ट होते हैं।144