विवाहित स्त्री को छल-प्रलोभन देकर यौन संबंध बनाने वाले की आयु दो जी घटती है—एक जी बारह वर्ष है। ऊपर के प्रत्येक चरण में सौ वर्ष, अर्थात नरक में दुख, फिर कीट-चींटी और पशु-पक्षी के रूप में, प्रत्येक में सौ कल्प। फिर मनुष्य-जन्म में अकेलापन मिलता है। मनुष्यलोक में दंड मिला हो तो तीस कल्प की छूट। इससे किसी की जान गई हो तो अपराध दो स्तर बढ़ता है। निष्ठा और माता-पिता के प्रति कर्तव्य के कर्म सात भाग घटा सकते हैं; तीन सौ मध्यम शुभ कर्म भी सात भाग घटाते हैं।132133
विवाहित स्त्री को रिझाकर यौन संबंध बनाने वाले की आयु एक जी घटती है। ऊपर के प्रत्येक चरण में सत्तर कल्प—नरक में दुख, फिर कीट-चींटी और पशु-पक्षी के रूप में, प्रत्येक में सत्तर कल्प। फिर मनुष्य-जन्म में मध्यम गरीबी मिलती है। मनुष्यलोक में दंड मिला हो तो बीस कल्प की छूट। इससे किसी की जान गई हो तो अपराध एक स्तर बढ़ता है। निष्ठा और माता-पिता के प्रति कर्तव्य के कर्म नौ भाग घटा सकते हैं; तीन सौ छोटे शुभ कर्म भी नौ भाग घटाते हैं।134
ऊपर की तीन श्रेणियाँ—विधवा, कुँवारी और विवाहित स्त्री—भिन्न कुलनाम वाले लोगों के लिए हैं। रिश्तेदार हों तो दंड दुगुना है। पारंपरिक शोक-वस्त्र की श्रेणी में आने वाले निकट संबंधियों में यह अपराध गंभीरता में निकट पारिवारिक यौन दुराचार से ठीक नीचे है; शोकावधि में हो तो अपराध तीन स्तर बढ़ता है। नौकरानी या दासी, किसी के साथ भी यौन दुराचार का निर्णय ऊपर के अनुसार होगा। कृत्य पूरा न हुआ हो तो आयु आधा जी घटती है। इससे किसी की जान गई हो तो पूर्ण कृत्य के समान माना जाएगा।
एक वेश्या के साथ संबंध बनाने पर आयु आधा वर्ष घटती है; गंभीर रोग लगे तो एक वर्ष। सुधार और पश्चात्ताप हो तो आयु-ह्रास माफ़ है। उस संबंध से एक पुत्र या पुत्री हो तो संबंध बनाने वाला व्यक्ति एक जन्म के लिए पशु बनता है; वह सुधार और पश्चात्ताप करे तो पशु-जन्म से छूट है।135
इस अनुच्छेद में पुरुषों से संबंधित वर्णित आचरण की श्रेणी पर स्त्रियों से संबंधित वही दंड-श्रेणियाँ लागू हैं; मूल के कोष्ठकीय कथन में ऐसे लोगों को ‘समलैंगिक व्यक्ति’ कहा गया है। संबंधित पुरुष की आयु सोलह वर्ष या उससे अधिक हो तो कुँवारी वाली श्रेणी के नियम, और सोलह वर्ष या उससे कम हो तो विवाहित स्त्री वाली श्रेणी के नियम लागू हैं। छोटे बालक को अपने साथ रखने वाली अंतिम स्थिति पर मूल में वेश्यागमन नाम से दी गई श्रेणी के नियम लागू हैं।136
अश्लील पुस्तक बनाने वाले की आयु दो जी घटती है। पुस्तक पढ़ने से यौन दुराचार की हानि हो तो अपराध लेखक पर पड़ता है। पुस्तक नष्ट न हो तो उसे कभी ऊर्ध्वगति नहीं मिलती। अश्लील नाटक और कामुक दृश्य फ़िल्माने वाले का अपराध भी यही है।
एक यौन दुराचार की बात प्रचारित करने पर आयु आधा जी घटती है। इससे किसी की मृत्यु हो तो एक जी। स्त्रियों के अंतःपुर की निजी बातों की चर्चा करने वाले का अपराध भी यही है। सुधार और पश्चात्ताप करे तो सभी अपराधों का स्तर घटता है।
न्यायाधिकारी लू का यौन दुराचार-विधान का पूरक अध्याय—न्यायाधिकारी का नाम झिदाओ था; वे सोंग काल के व्यक्ति थे
यौन दुराचार के मामले में औषधि से गर्भपात करके एक जीवन नष्ट हो, तो दंड दुगुना है।137
इस अनुच्छेद में वर्णित कुँवारी से संबंधित मामलों में, आयु बारह वर्ष या उससे अधिक होने पर, मूल में छल-प्रलोभन अथवा रिझाने की श्रेणी में रखे मामले भी बलात्कार की दंड-श्रेणी में माने जाएँगे। यदि इस कारण किसी की मृत्यु हो तो दंड दुगुना होगा।138