यौन दुराचार के लिए परलोक के दंड-विधान
सदा से अकुशल पापों में यौन दुराचार सबसे बड़ा है। मनुष्यलोक में इसका अपराध अत्यंत गंभीर है, परलोक का दंड और कठोर। दंड बहुत प्रकार के हैं; यहाँ मुख्य बिंदु संक्षेप में दिए हैं। इस अध्याय को देखने वाले सभी को संयम और सावधानी रखनी चाहिए।122
निकट पारिवारिक संबंधों में यौन दुराचार करने वाला सदा नरक में बंद रहता है। किसी की जान ली हो तो बिजली गिरने से मृत्यु होती है। शव के साथ दुराचार करने वाले का अपराध भी यही है। मनुष्यलोक में दंड भोग चुके सभी को बिजली गिरने की विपत्ति से छूट है। निष्ठा और माता-पिता के प्रति कर्तव्य के कर्म हों तो चार भाग घटाए जा सकते हैं। पंद्रह सौ बड़े शुभ कर्म भी चार भाग घटाते हैं।123
विधवा से बलात्कार करने वाले का इसी जीवन में वंश समाप्त होता है। नरक में पाँच सौ कल्प दुख भोगता है, फिर कीट-चींटी बनकर पाँच सौ कल्प, फिर पशु-पक्षी बनकर पाँच सौ कल्प। फिर मनुष्य-जन्म में वेश्या का शरीर मिलता है। मनुष्यलोक में दंड मिला हो तो सौ कल्प की छूट। इससे किसी की जान गई हो तो अपराध पाँच स्तर बढ़ता है। निष्ठा और माता-पिता के प्रति कर्तव्य के कर्म आधा दंड घटा सकते हैं; पाँच सौ बड़े शुभ कर्म भी आधा घटाते हैं।124
विधवा को छल-प्रलोभन देकर यौन संबंध बनाने वाला दो जन्मों तक वंशहीन रहता है। ऊपर के प्रत्येक चरण में चार सौ कल्प—नरक में दुख, फिर कीट-चींटी और पशु-पक्षी के रूप में, प्रत्येक में चार सौ कल्प। फिर मनुष्य-जन्म में विकलांग शरीर मिलता है। मनुष्यलोक में दंड मिला हो तो अस्सी कल्प की छूट। इससे किसी की जान गई हो तो अपराध चार स्तर बढ़ता है। निष्ठा और माता-पिता के प्रति कर्तव्य के कर्म सात भाग घटा सकते हैं; पाँच सौ मध्यम शुभ कर्म भी सात भाग घटाते हैं।125126
विधवा को रिझाकर यौन संबंध बनाने वाला तीन जन्मों तक वंशहीन रहता है। ऊपर के प्रत्येक चरण में तीन सौ कल्प—नरक में दुख, फिर कीट-चींटी और पशु-पक्षी के रूप में, प्रत्येक में तीन सौ कल्प। फिर मनुष्य-जन्म में गरीबी और हीन दशा मिलती है। मनुष्यलोक में दंड मिला हो तो साठ कल्प की छूट। इससे किसी की जान गई हो तो अपराध तीन स्तर बढ़ता है। निष्ठा और माता-पिता के प्रति कर्तव्य के कर्म नौ भाग घटा सकते हैं; पाँच सौ छोटे शुभ कर्म भी नौ भाग घटाते हैं।127
कुँवारी से बलात्कार करने वाले के पुत्र-पुत्रियाँ दुराचारी होते हैं। ऊपर के प्रत्येक चरण में चार सौ कल्प—नरक में दुख, फिर कीट-चींटी और पशु-पक्षी के रूप में, प्रत्येक में चार सौ कल्प। फिर मनुष्य-जन्म में दास-सेवक बनता है। मनुष्यलोक में दंड मिला हो तो सौ कल्प की छूट। इससे किसी की जान गई हो तो अपराध चार स्तर बढ़ता है। निष्ठा और माता-पिता के प्रति कर्तव्य के कर्म आधा दंड घटा सकते हैं; चार सौ बड़े शुभ कर्म भी आधा घटाते हैं।128
कुँवारी को छल-प्रलोभन देकर यौन संबंध बनाने वाला दो जन्मों तक वंशहीन रहता है। ऊपर के प्रत्येक चरण में ढाई सौ कल्प—नरक में दुख, फिर कीट-चींटी और पशु-पक्षी के रूप में, प्रत्येक में ढाई सौ कल्प। फिर मनुष्य-जन्म में रोगी शरीर मिलता है। मनुष्यलोक में दंड मिला हो तो सत्तर कल्प की छूट। इससे किसी की जान गई हो तो अपराध तीन स्तर बढ़ता है। निष्ठा और माता-पिता के प्रति कर्तव्य के कर्म सात भाग घटा सकते हैं; चार सौ मध्यम शुभ कर्म भी सात भाग घटाते हैं।129
कुँवारी को रिझाकर यौन संबंध बनाने वाले का ऋण पत्नी और बेटियों से चुकता होता है। ऊपर के प्रत्येक चरण में सौ कल्प—नरक में दुख, फिर कीट-चींटी और पशु-पक्षी के रूप में, प्रत्येक में सौ कल्प। फिर मनुष्य-जन्म में मध्यम गरीबी मिलती है। मनुष्यलोक में दंड मिला हो तो चालीस कल्प की छूट। इससे किसी की जान गई हो तो अपराध दो स्तर बढ़ता है। निष्ठा और माता-पिता के प्रति कर्तव्य के कर्म नौ भाग घटा सकते हैं; चार सौ छोटे शुभ कर्म भी नौ भाग घटाते हैं।130
विवाहित स्त्री से बलात्कार करने वाले का ऋण पत्नी और बेटियों से चुकता होता है। ऊपर के प्रत्येक चरण में साढ़े तीन सौ कल्प—नरक में दुख, फिर कीट-चींटी और पशु-पक्षी के रूप में, प्रत्येक में साढ़े तीन सौ कल्प। फिर मनुष्य रूप में जन्म लेने पर स्थानीय दफ़्तर का अधीनस्थ कारिंदा बनता है। मनुष्यलोक में दंड मिला हो तो सौ कल्प की छूट। इससे किसी की जान गई हो तो अपराध तीन स्तर बढ़ता है। निष्ठा और माता-पिता के प्रति कर्तव्य के कर्म आधा दंड घटा सकते हैं; तीन सौ बड़े शुभ कर्म भी आधा घटाते हैं।131