स्वर्ग, पृथ्वी, प्रेतों और देवताओं के प्रति कृतज्ञता!
शांगगुआन युहुआ गुरुजी के प्रति कृतज्ञता!
वेनशु मोचिए गुरुजी के प्रति कृतज्ञता!
उन सभी के प्रति कृतज्ञता जिन्होंने ‘परलोक के अटल विधान’ को संसार में प्रसारित करने में योगदान दिया!
मियाओशेंग
पुण्य-समर्पण गाथा
इस पुण्य से पूर्व और वर्तमान कर्मों का निवारण हो
समस्त पुण्य और प्रज्ञा बढ़ें श्रेष्ठ कुशल-मूल पूर्ण हों
युद्धजन्य सभी विपत्तियाँ और अकाल आदि
सब पूरी तरह मिट जाएँ हर व्यक्ति शिष्टाचार और विनय का अभ्यास करे