1/जीवन-मृत्यु की बही
2/तो सब कुछ पहले ही लिखा जा चुका था! — मानव भाग्य का कूट और आयु का बढ़ना-घटना; जीवन-मृत्यु की बही देखकर आकाशीय रहस्य जानना!
3/अंततः उस दुष्कर्म-दर्पण के दर्शन हुए जिसकी चर्चा लंबे समय से सुनती आई थी—दुष्कर्म-दर्पण के मंच के सामने कोई भला व्यक्ति नहीं!
4/परलोक के सर्वोच्च अधिपति, सम्राट यमराज
5/《परलोक का आत्मिक सत्ता संबंधी आधिकारिक पत्र》—बैलमुख और अश्वमुख मनुष्य की आयु पूरी होने पर की जाने वाली समस्त कार्यवाही विस्तार से बताते हैं
6/सदाचार और दुराचार प्राचीन काल से बर्फ़ और अंगारे जैसे रहे हैं; निंदा और प्रशंसा में आज सत्य और असत्य का निर्णय हो! — एक युग के राष्ट्रनायक सेनापति यूए फ़ेई से भेंट और बीते दिनों की घटनाओं का विस्तृत वृत्तांत
7/मेंग पो के सूप का एक प्याला, उपकार और वैर दोनों भुला दे! — यूवांग मंच का प्रत्यक्ष भ्रमण
8/भोजन बरबाद करने का दर्दनाक कर्मफल—पाँच अनाजों की भरपूर फ़सल नरक
9/बुद्ध का स्वयं दिया हुआ उपदेश: भोजन और पेय बरबाद करने पर अवश्य नरक में गिरकर कष्ट भोगना पड़ता है!
10/बुद्ध कहते हैं: स्वादिष्ट भोजन के प्रति आसक्ति और पेट भरने से भी अधिक खाना मनुष्य को आसानी से दुर्गतियों में गिरा सकता है!