सम्राट का यह संयम-सूत्र संसार को समझाने की सच्ची लगन से बना है, जैसे वृद्ध माँ अपने बच्चों से प्रेम करती है। आठ गुफाओं के अमर इसे देखें तो हाथ जोड़कर प्रशंसा करेंगे। नदी में विहार करने वाले पाँच वृद्ध भी सिर उठाकर इसके धर्म की भलाई और सुंदरता सराहेंगे।
सरल और अल्प होने से न हिचककर सब लोगों को दिखाता हूँ।
‘जनसमुदाय’ काले बाल वाले लोग हैं। सम्राट कहते हैं: सरल और अल्प इस सूत्र को सबके सामने रखने में संकोच नहीं, क्योंकि सचमुच चाहता हूँ कि तुम लोग लौटकर यौन दुराचार न करो।
बेर-चेस्टनट की छपाई-पट्टियों को सौंपकर गहरी आशा उठती है।
बेर और चेस्टनट दोनों की लकड़ी पर छपाई के पट्टे बनाए जा सकते हैं। सम्राट कहते हैं: सूत्र जनता को देने के बाद आशा है तुम इसे मुद्रणालय को देकर पट्टे बनवाओ, छपवाकर बाँटो और लोगों को समझाओ। लेकिन इतनी गहरी आशा का वास्तविक लक्ष्य है कि लोग शीघ्र इसका पालन करें।
यौन दुराचार से विरत रहने की कविता
स्पष्ट मृत्यु-पथ स्वयं खोजते हो; प्रेम गहरा बताना व्यर्थ, पाप उससे भी गहरा है।
सुंदर रूप को ऐसे देखो मानो वह राक्षस का रूप हो; देव-प्रेतों को धोखा देकर अनुचित मन न उठाओ।
यांगताई के एक स्वप्न में कौन-सा स्थायी आनंद? परलोक के तीन दंड-विधानों की भयावहता सहना कठिन।
दूसरों की पत्नी-बेटियों से दुराचार करने वालों से पूछो: अपनी पत्नी-बेटियों पर वैसा कौन स्वीकार करेगा?