शांगगुआन युहुआ! आपको 《परलोक के अटल विधान》 बहुत ध्यान से लिखनी चाहिए, क्योंकि आजकल नरक में गिरने वाले प्राणी सचमुच बहुत, बहुत अधिक हैं! आशा है कि यह पुस्तक जल्द से जल्द छपेगी, ताकि जनता इसे पढ़कर बुराई छोड़ अच्छाई की ओर मुड़े, स्वयं को सुधारे और दूसरों को भी लाभ पहुँचाए। ऐसा होने पर हवाएँ अनुकूल चलेंगी, वर्षा समय पर होगी और देश में युद्ध नहीं होगा।
अच्छा! आज के लिए इतना ही। मेरे पास अभी राजकीय काम हैं। और प्रश्न हों, तो अगली बार फिर आइए!”
मैं, आ यू, हाथ जोड़कर सेनापति यूए फ़ेई के प्रति आभार व्यक्त करती हूँ!
परलोक के न्यायाधिकारी का आभार! सभी यक्ष अंगरक्षकों का आभार!
श्वेत कमल पर सवार होकर लौटती हूँ।
परिशिष्ट:
यूए होउ की पाषाण प्रतिमा को देखकर — लिउ श्येनलुन, सोंग राजवंश
बीते वर्षों में युद्ध का नगाड़ा बजाते हुए आपने सीमांत पर सेवा की, आप जैसे राजपुरुष के जीवन से देश का उत्थान और पतन जुड़ा था।
चारों समुद्रों के बीच कितने लोग वूमू को याद करते हैं?87 सौ वर्ष बाद आज उनकी आकृति के दर्शन हुए।
कलम की नोक पर पवन और चाँदनी के तीन हज़ार अक्षर, मुख की वाणी में हिम और पाले जैसे कठोर एक लाख सैनिक।