सर्वथा निर्दोष पर चला वह मुकदमा, कितना घृणित, और उससे भी अधिक करुण— फ़ेंगबो का कारावास!
क्या मध्यभूमि के सिकुड़ जाने की चिंता न थी? क्या हुई और छिन के अपमान पर दुख न था?
लेकिन यदि हुई और छिन वापस आ जाते, तो स्वयं तुम्हारा स्थान कहाँ रहता!
हज़ार वर्षों तक दक्षिण की ओर पलायन की भूल की चर्चा छोड़ो, उस समय तो स्वयं मध्यभूमि की पुनर्प्राप्ति का भय था।
हँसी आती है—एक तुच्छ हुई अकेला भला क्या कर सकता था? उसने तो तुम्हारी इच्छा ही पूरी की।
यूए वूमू के स्मृति-मंदिर में दर्शन के बाद के भाव — बाझी तोउतुओ, छिंग राजवंश
दक्षिण जाकर एक कोने की सुरक्षा में सिमटा राज्य पहले ही खो चुका था, मंदिर और समाधि के वृक्ष अब भी घने हरे हैं।
असाधारण निष्ठा के बिना किसी पुरुष का नाम अमर होना कठिन है, जिस भूमि पर निष्ठावान आत्मा हो, वहाँ की घास भी सुगंधित होती है।
हवा और बारिश में झील और पर्वत अब भी उस खेद को अनुभव करते हैं, आते-जाते लकड़हारे और चरवाहे भी उदास हैं।
यदि दोनों सम्राट जीवित रहते लौट आए होते, तो ढलते सूर्य के सामने कौन रक्तभरे आँसू बहाता?